भारतीय रेलवे ने UDID कार्ड धारकों के लिए आरक्षित कोच में यात्रा आसान की, नए नियमों से दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
देश में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। रेलवे द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब वैध यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड रखने वाले दिव्यांग यात्रियों को ट्रेनों के आरक्षित कोचों में प्रवेश और यात्रा करने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान और डिजिटल बना दी गई है। 20 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, यह कदम दिव्यांग यात्रियों को बेहतर सुविधा और सम्मानजनक यात्रा अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि जिन दिव्यांग व्यक्तियों के पास वैध UDID कार्ड है, उन्हें मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के विशेष रूप से आरक्षित कोचों में ‘बोनाफाइड’ यानी वास्तविक यात्री के रूप में मान्यता दी जाएगी। यह सुविधा उन यात्रियों पर भी लागू होगी, जो रेलवे के नियमों के तहत किराए में रियायत के पात्र हैं। इससे पहले कई बार पहचान और दस्तावेजों को लेकर होने वाली दिक्कतों के कारण दिव्यांग यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था, जिसे अब डिजिटल पहचान के जरिए काफी हद तक खत्म करने की कोशिश की गई है।
रेलवे ने इस बदलाव के साथ सख्ती का संकेत भी दिया है। विभाग ने साफ कहा है कि दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित कोचों में अगर कोई अनधिकृत व्यक्ति यात्रा करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सुविधाओं का लाभ केवल पात्र लोगों को ही मिले।
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इसके अलावा रेलवे ने ‘दिव्यांगजन कार्ड’ या EPICS (E-ticketing Photo Identity Card for Persons with Disability) के महत्व को भी दोहराया है। यह कार्ड न केवल पहचान का प्रमाण है, बल्कि इसके जरिए यात्रियों को किराए में छूट और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। डिजिटल सिस्टम के माध्यम से अब यह पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान हो गई है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए IRCTC प्लेटफॉर्म पर भी खास व्यवस्था की गई है। यात्री ‘My Account’ सेक्शन में जाकर ‘Master List’ में अपनी जानकारी जोड़ सकते हैं और ‘Person with Disability’ विकल्प चुनकर रियायत के साथ टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग प्रक्रिया के दौरान सिस्टम खुद ही कंसेशन लागू कर देता है, जिससे बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ती।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह नई व्यवस्था न केवल दिव्यांग यात्रियों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि रेलवे सिस्टम को भी अधिक आधुनिक और समावेशी बनाएगी। डिजिटल पहचान आधारित यह पहल सरकार के ‘ईज ऑफ ट्रैवल’ और ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को भी मजबूत करती है। आने वाले समय में इस तरह के और सुधारों की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे हर वर्ग के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

