हरियाणा विधानसभा में POSH एक्ट 2013 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने महिलाओं के सम्मान को कानूनी जिम्मेदारी बताया।
हरियाणा विधानसभा में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न’ विषय पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण और उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा की विशेष उपस्थिति रही, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग की चेयरपर्सन डॉ. वंदना अरोड़ा ने विषय विशेषज्ञ के रूप में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान की रक्षा केवल सामाजिक या नैतिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि एक सशक्त कानूनी दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे संस्थान, जहां कानूनों का निर्माण होता है, वहां कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी का यह कर्तव्य है कि वह संबंधित कानूनों की गहन समझ रखे और उनका पालन सुनिश्चित करे। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूकता बेहतर कानून निर्माण की नींव है और प्रशिक्षण से कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
उन्होंने समाज के दृष्टिकोण को बदलने पर जोर देते हुए कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि जब हमारी बेटियां घर से बाहर काम के लिए निकलती हैं, तो हम उनके लिए कैसा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण चाहते हैं। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तावित ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सशक्त माहौल तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने भारतीय परंपराओं और संस्कारों का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। बदलते समय के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके चलते बेटियों के जन्म पर भी अब उत्सव मनाए जा रहे हैं।
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इस अवसर पर डॉ. वंदना अरोड़ा ने ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ यानी POSH एक्ट की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि यह कानून देश के सभी सार्वजनिक और निजी संस्थानों पर लागू होता है। उन्होंने जानकारी दी कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है, जबकि जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति (LCC) उन मामलों को देखती है, जहां ICC उपलब्ध नहीं होती। उन्होंने यह भी बताया कि इस कानून की नींव 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी ‘विशाखा दिशानिर्देशों’ के बाद रखी गई थी।
डॉ. अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत शिकायतों की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है और झूठी शिकायतों के मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। कार्यक्रम के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि सुरक्षित कार्यस्थल न केवल महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा करता है, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तिकरण का भी आधार बनता है।
कार्यक्रम के अंत में विधानसभा सचिव राजीव प्रसाद ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें समान अवसर प्रदान करना एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए अनिवार्य है। इस आयोजन के माध्यम से कर्मचारियों और अधिकारियों को न केवल कानून की जानकारी मिली, बल्कि एक सुरक्षित, संवेदनशील और जिम्मेदार कार्यस्थल बनाने की दिशा में भी प्रेरणा प्राप्त हुई।

