हरियाणा ने 1560 स्वास्थ्य संस्थानों को प्रमाणित कर राष्ट्रीय मानकों को पार किया, सरकार ने 2026 तक 100% क्वालिटी सर्टिफिकेशन का लक्ष्य रखा।
हरियाणा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए राष्ट्रीय मानकों को पीछे छोड़ दिया है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के नेतृत्व में लागू किए गए सुधारों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव Dr. Sumita Mishra ने चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि हरियाणा ने नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम (NQAS) और कायाकल्प अवार्ड पहल के तहत अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है।
उन्होंने जानकारी दी कि हरियाणा स्टेट हेल्थ रिसोर्स सेंटर (HSHRC) द्वारा अब तक 1,560 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को प्रमाणित किया जा चुका है, जिससे राज्य की सर्टिफिकेशन दर 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत लक्ष्य से कहीं अधिक है, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से हो रहे सुधार का संकेत देता है।
हरियाणा की इस उपलब्धि को और खास बनाती हैं वे ऐतिहासिक उपलब्धियां, जिनमें पंचकूला का जिला सिविल अस्पताल देश का पहला एनक्यूएएस प्रमाणित जिला अस्पताल बना। इसके बाद कृष्णा नगर, गामरी स्थित अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर देश का पहला प्रमाणित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना। वहीं, फरीदाबाद का सिविल अस्पताल ‘मुस्कान’ सर्टिफिकेशन हासिल करने वाला पहला जिला अस्पताल बना, जबकि सोनीपत के रायपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर उपकेंद्र को देश का पहला वर्चुअली असेस्ड प्रमाणित केंद्र बनने का गौरव मिला।
राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों के विभिन्न स्तरों पर सर्टिफिकेशन की स्थिति भी काफी उत्साहजनक है। लगभग सभी जिला अस्पतालों में से 95 प्रतिशत यानी 21 अस्पताल प्रमाणित हो चुके हैं। उप-जिला अस्पतालों में 57 प्रतिशत और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 35 प्रतिशत संस्थानों को सर्टिफिकेशन प्राप्त हो चुका है। वहीं जमीनी स्तर पर काम कर रहे आयुष्मान आरोग्य मंदिर उपकेंद्रों में 65 प्रतिशत यानी 1,342 केंद्र प्रमाणित किए जा चुके हैं, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का स्पष्ट संकेत है।
also read : रेवाड़ी में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: 12 नए व अपग्रेडेड हेल्थ सेंटर को मंजूरी, ग्रामीणों को मिलेगा बड़ा लाभ
कायाकल्प अवॉर्ड कार्यक्रम के तहत स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए भी बड़े स्तर पर काम किया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान हजारों संस्थानों ने आंतरिक और बाहरी मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी की, जिनमें से 1,539 संस्थानों ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर प्रोत्साहन के लिए पात्रता हासिल की। यह उपलब्धि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता और गुणवत्ता के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।
इन सुधारों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 5.39 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। सरकार का उद्देश्य केवल सर्टिफिकेशन हासिल करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को मरीज-केंद्रित, सुलभ और मानकीकृत बनाना है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने दिसंबर 2026 तक सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को 100 प्रतिशत एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सतत निगरानी, क्षमता निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हरियाणा में तेजी से बढ़ती प्रमाणित स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर स्वच्छता मानक और सेवाओं की गुणवत्ता यह दर्शाती है कि राज्य एक मजबूत और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में इस तरह के प्रयास किए जा सकते हैं।

