Rao Narbir Singh की अध्यक्षता में बैठक, डस्ट पोर्टल, STP प्रोजेक्ट और सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।
गुरुग्राम में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में हरियाणा के पर्यावरण मंत्री Rao Narbir Singh ने राज्य में बढ़ते वायु और जल प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) वेस्ट मैनेजमेंट, सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध, सीईटीपी/ईटीपी की स्थिति, हरित क्षेत्र विकास और पर्यावरणीय नियमों के पालन जैसे अहम मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है।
बैठक के दौरान डस्ट पोर्टल से जुड़े मामलों पर विशेष जोर देते हुए Rao Narbir Singh ने निर्देश दिए कि 500 वर्ग गज से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी निर्माण साइट्स का पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। जिन साइट्स ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनके खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर चालान किए जाएं, जबकि पंजीकृत साइट्स पर भी नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि गुरुग्राम की सभी प्रमुख निर्माण साइट्स पर अगले 15 दिनों के भीतर कवरिंग और बैरिकेडिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि धूल प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
वायु गुणवत्ता सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 29 कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन पहले से संचालित हैं और एनसीआर क्षेत्र में 23 नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 46 मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशन और 4 अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं भी सक्रिय हैं। औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के लिए 521 उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों अन्य इकाइयों को भी इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए हजारों साइट्स को डस्ट पोर्टल पर पंजीकृत कर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
सड़क धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी व्यापक उपाय किए जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्रों में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है और बड़ी संख्या में एंटी-स्मॉग गन तथा वाटर स्प्रिंकलर का उपयोग किया जा रहा है। सिटी एक्शन प्लान के तहत एनसीआर में हजारों किलोमीटर सड़कों की पहचान कर उन्हें डस्ट-फ्री बनाने की दिशा में काम जारी है।
जल प्रदूषण नियंत्रण के तहत यमुना एक्शन प्लान को लेकर मंत्री ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी स्रोतों की पहचान की जाए, जहां से बिना उपचारित पानी नालों या यमुना में गिर रहा है, और जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा से यमुना में जाने वाले अपशिष्ट जल की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए कई परियोजनाएं चल रही हैं।
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सीवरेज प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राज्य में 133 एमएलडी क्षमता के 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माणाधीन हैं, जिन्हें 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा यमुना कैचमेंट क्षेत्र में 288.5 एमएलडी क्षमता के 7 एसटीपी का अपग्रेडेशन किया जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण नियंत्रण को और मजबूती मिलेगी। सरकार ने भविष्य में 1000 करोड़ रुपये की लागत से 425 एमएलडी क्षमता के अतिरिक्त एसटीपी स्थापित करने की योजना भी बनाई है।
Rao Narbir Singh ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 2027 तक नालों में बीओडी स्तर को 10 एमजी/लीटर से कम करने का लक्ष्य हासिल किया जाए। इसके लिए उद्योगों पर कड़ी निगरानी रखने, सरप्राइज निरीक्षण करने और बाईपास या अवैध निस्तारण पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ईटीपी, सीईटीपी और एसटीपी पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सके।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि छोटे दुकानदारों के बजाय बड़े स्टॉकिस्टों को निशाना बनाया जाए, ताकि बाजार में इसकी आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उन्होंने हाल ही में चलाए गए अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
बैठक में बंधवाड़ी लैंडफिल साइट, आरएमसी प्लांट्स और बूचड़खानों से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निपटान में तेजी लाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस समीक्षा बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हरियाणा सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गंभीर है और आने वाले वर्षों में राज्य को स्वच्छ और पर्यावरणीय रूप से संतुलित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

