हरियाणा में एनसीएलटी आदेश और कोर्ट डिक्री के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को लेकर एफसीआर डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए, लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई।
हरियाणा में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेशों और अदालती डिक्री के अनिवार्य पंजीकरण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। हरियाणा की वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत इन आदेशों और डिक्री का अनिवार्य रूप से पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
डॉ. मिश्रा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि कई मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO), सब-रजिस्ट्रार (SR) और जॉइंट सब-रजिस्ट्रार (JSR) पहले से जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। वर्ष 2013 और 2017 में जारी आदेशों और अधिसूचनाओं के बावजूद, एनसीएलटी आदेशों और कोर्ट डिक्री के पंजीकरण में लापरवाही बरती जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडियन स्टांप एक्ट, 1899 के तहत एनसीएलटी से जुड़े मामलों में अनुच्छेद 23-ए के अनुसार 1.5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देय होती है, जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 करोड़ रुपये है। इसी तरह, गैर-बोना फाइड कोर्ट डिक्री भी इसी प्रावधान के अंतर्गत आती हैं। इन नियमों का पालन न होने के कारण राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी के राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में स्टांप ड्यूटी का सही आकलन कर बिना किसी अपवाद के पंजीकरण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चाहिए, ताकि भविष्य में राजस्व को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।
also read : 25 साल की उम्र में रैपर लिल पॉप्पा का निधन, गर्लफ्रेंड टोई रॉबर्ट्स और बेटे PJ के साथ निजी जिंदगी को लेकर बढ़ी दिलचस्पी
इसके अलावा, उन्होंने एक और गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। कई मामलों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े स्टे ऑर्डर जब सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में पहुंचते हैं, तो उन्हें जमाबंदी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता। डॉ. मिश्रा ने इसे अदालत के आदेशों का उल्लंघन बताया और कहा कि सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) यह सुनिश्चित करें कि किसी भी सक्षम अदालत से प्राप्त स्टे ऑर्डर को तुरंत राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
वित्त आयुक्त ने सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों को अपने अधीनस्थ सभी राजस्व अधिकारियों तक पहुंचाया जाए और शब्दशः तथा भावना के अनुरूप इनका पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस सख्त कदम का उद्देश्य न केवल राजस्व नुकसान को रोकना है, बल्कि न्यायालय और एनसीएलटी के आदेशों के सही और पारदर्शी क्रियान्वयन को भी सुनिश्चित करना है।

