Anurag Rastogi की समीक्षा में निर्णय—हरियाणा में शिक्षकों को विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान हरियाणा सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य के मुख्य सचिव Anurag Rastogi ने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बी.एड. और डी.एल.एड. जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से निकलने वाला हर शिक्षक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनके साथ संवाद और प्रभावी शिक्षण के लिए आवश्यक कौशल से पूरी तरह सुसज्जित हो। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे भविष्य के शिक्षकों में संवेदनशीलता और विशेषज्ञता दोनों विकसित हो सकें।
बैठक के दौरान राज्य में संचालित विशेष शिक्षा पाठ्यक्रमों और पुनर्वास संस्थानों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न संस्थानों में 300 से अधिक प्रशिक्षु शिक्षक विशेष शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव G Anupama ने बताया कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में शिक्षकों को ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम और सीखने में कठिनाइयों जैसी स्थितियों की पहचान और उनके समाधान के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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सरकार का उद्देश्य केवल नए शिक्षकों को प्रशिक्षित करना ही नहीं, बल्कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को भी इस दिशा में सक्षम बनाना है। इसके तहत सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी विशेष रूप से तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शुरुआती पहचान और हस्तक्षेप की तकनीकों से परिचित कराया जाएगा। इससे कक्षा में ऐसे बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य पुनर्वास सेवाओं को भी मजबूत करना है, ताकि विशेष क्षमताओं वाले व्यक्तियों को शिक्षा के साथ-साथ आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन भी मिल सके। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित मानव संसाधन के बिना समावेशी शिक्षा का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता, इसलिए इस दिशा में व्यापक स्तर पर निवेश और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है।
बैठक में Vijay Singh Dahiya सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समावेशी शिक्षा केवल नीति तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो।
हरियाणा सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है, जहां हर बच्चे को उसकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम न केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि समाज में समानता और समावेशिता को भी मजबूत करेगा।

