हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालकों की आय को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में एक अहम और दूरदर्शी कदम उठाया है। राज्य सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के तहत शहद के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित कर दिया है, जिससे प्रदेश के हजारों मधुमक्खी पालकों को सीधा लाभ मिलेगा। योजना के अंतर्गत शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है।
इस फैसले की जानकारी देते हुए हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री सिंह राणा ने कहा कि इस निर्णय से मधुमक्खी पालकों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित व सुनिश्चित मूल्य प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसे सहायक कृषि व्यवसायों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रभावी नीतियां लागू कर रही है।
मंत्री ने बताया कि मधुमक्खी पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यह न केवल किसानों और युवाओं के लिए अतिरिक्त आय का साधन है, बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में शहद के लिए संरक्षित मूल्य तय करना मधुमक्खी पालकों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अब यदि बाजार में शहद की कीमत संरक्षित मूल्य से नीचे जाती है, तो भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई करेगी। इससे मधुमक्खी पालकों को नुकसान से बचाया जा सकेगा और वे बिना किसी भय के अपने उत्पाद को बाजार में बेच सकेंगे। यह योजना खास तौर पर छोटे और मध्यम स्तर के मधुमक्खी पालकों के लिए संजीवनी साबित होगी।
राज्य सरकार के इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और अनुदान जैसी सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध करा रही है। अब संरक्षित मूल्य तय होने से इस क्षेत्र में निवेश और रुचि दोनों में वृद्धि होगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि शहद के लिए न्यूनतम संरक्षित मूल्य तय होने से बाजार में स्थिरता आएगी और बिचौलियों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। इससे शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण शहद के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिसका लाभ उपभोक्ताओं को भी होगा।
अंत में मंत्री सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों और कृषि से जुड़े सभी वर्गों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में प्रतिबद्ध है। मधुमक्खी पालकों के लिए संरक्षित मूल्य तय करना इसी सोच का परिणाम है। सरकार भविष्य में भी ऐसे निर्णय लेती रहेगी, जिससे किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो तथा प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़े।

