हरियाणा CM नायब सैनी ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर विपक्ष पर आरोप लगाए और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक कदम बताया।
हरियाणा की राजनीति में महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है, जहां नायब सिंह सैनी ने एक अहम बयान देते हुए कहा कि देश में लंबे समय तक महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके इस बयान को महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सीएम नायब सिंह सैनी ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रखा। उन्होंने कहा कि कई अहम फैसलों को जानबूझकर टाला गया, जिससे महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया धीमी हो गई। उनके अनुसार, यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाते, तो आज महिलाओं की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती थी। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
अपने संबोधन में उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने इसे केवल प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता को विकसित करने का माध्यम बताया, जो महिलाओं को नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा।
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महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि भारतीय इतिहास इस बात का गवाह है कि महिलाओं ने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने कहा कि आज का समाज तेजी से बदल रहा है और महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस दिशा में सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
सीएम ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन अभियानों ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के कारण बेटियों के प्रति लोगों की सोच में सुधार आया है और शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है। सरकार का फोकस अब महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में योगदान दे सकें।
कुल मिलाकर, नायब सिंह सैनी का यह बयान स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास जारी रहने की बात भी उन्होंने कही, जिससे यह मुद्दा आने वाले राजनीतिक विमर्श में प्रमुख स्थान बनाए रख सकता है।

