डॉ. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा में आयुष्मान भारत और चिरायु योजना की समीक्षा कर थर्ड-पार्टी ऑडिट और सरकारी अस्पतालों के क्लेम बढ़ाने के निर्देश दिए।
हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डॉ. सुमिता मिश्रा ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और चिरायु योजना हरियाणा की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। चंडीगढ़ में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की जाए। इस दौरान हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को ऑडिट और क्लेम प्रक्रिया के लिए थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर के माध्यम से सख्त निगरानी लागू करने के आदेश भी दिए गए।
समीक्षा बैठक में डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत थर्ड-पार्टी ऑडिट को अनिवार्य किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी को रोका जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में क्लेम की संख्या बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाए। उनका मानना है कि यदि सरकारी संस्थान अधिक सक्रिय रूप से क्लेम दाखिल करें, तो इससे न केवल मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की उपयोगिता भी बढ़ेगी।
बैठक के दौरान किडनी से संबंधित गंभीर रोगों, विशेषकर क्रोनिक हीमोडायलिसिस के मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि ऐसे मरीजों के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत नियमित और सक्रिय क्लेम दाखिल करना बेहद जरूरी है, ताकि उन्हें बार-बार होने वाले महंगे इलाज के लिए किसी आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर और कैशलेस उपचार उपलब्ध हो सके।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि हरियाणा ने अब तक आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत करीब 28 लाख क्लेम का निपटारा किया है और राज्य के लाभार्थियों को 3,900 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ही क्लेम की राशि 1,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि लोगों में इन योजनाओं के प्रति जागरूकता और भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
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राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए एक मजबूत नेटवर्क भी तैयार किया गया है। वर्तमान में 1,363 पैनल वाले अस्पतालों (777 निजी और 586 सरकारी) का नेटवर्क कार्यरत है, जिससे राज्य के नागरिकों को व्यापक स्तर पर कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। यह नेटवर्क सुनिश्चित करता है कि लाभार्थियों को उनके नजदीकी क्षेत्रों में ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
हरियाणा सरकार ने चिरायु योजना हरियाणा के माध्यम से आयुष्मान भारत की राष्ट्रीय रूपरेखा से आगे बढ़ते हुए कवरेज का विस्तार भी किया है। इस योजना के तहत 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को शामिल किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ सके हैं। अब तक राज्य में लगभग 1.38 करोड़ पात्र लाभार्थियों के कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में हुई यह समीक्षा बैठक हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में इन निर्देशों के प्रभाव से न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

