गुरुग्राम में ड्रेनों और वेस्ट साइट्स के निरीक्षण के दौरान प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त कार्रवाई और समयबद्ध रिपोर्ट के निर्देश
हरियाणा में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गुरुग्राम में प्रमुख ड्रेनों और वेस्ट प्रोसेसिंग साइट्स का व्यापक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का नेतृत्व बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने किया, जिन्होंने विभिन्न स्थलों पर जाकर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और उन्हें नियंत्रित करने के उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान लेग-3 ड्रेन, जिसे आमतौर पर बादशाहपुर ड्रेन के नाम से जाना जाता है, विशेष रूप से फोकस में रहा। अधिकारियों ने ड्रेन में बह रहे प्रदूषित जल के स्रोतों का आकलन किया और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जिन स्रोतों को अभी तक टैप नहीं किया गया है, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाए। सदस्य सचिव ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन अनियंत्रित स्रोतों पर समयबद्ध कार्रवाई करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) शीघ्र प्रस्तुत की जाए। उन्होंने नगर निगम गुरुग्राम क्षेत्र की कॉलोनियों से निकलने वाले सीवेज को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करने और उसके उचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।
इस दौरान अधिकारियों को सीवरेज डायवर्जन और ट्रीटमेंट प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि बिना उपचार के सीवेज का पानी ड्रेनों में न पहुंचे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम करें और पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, जिससे प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
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निरीक्षण के दौरान नगर निगम गुरुग्राम की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई, विशेष रूप से ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) वेस्ट के प्रबंधन को लेकर। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वेस्ट प्रोसेसिंग साइट्स पर नियमित निगरानी रखी जाए और मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित पर्यावरण मानकों के अनुरूप चल रही हैं।
इसके अलावा, कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी का भी निरीक्षण किया गया, जहां प्लांट की कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया गया। प्लांट संचालक को निर्देश दिए गए कि वह उन सभी स्वास्थ्य संस्थानों का पूरा विवरण प्रस्तुत करे, जिनके साथ उसका वैध अनुबंध है, साथ ही प्राप्त और निस्तारित किए गए बायोमेडिकल कचरे का विस्तृत रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण सुरक्षित और नियमानुसार किया जा रहा है।
सदस्य सचिव ने आम नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) से भी अपील की कि वे घरेलू सीवेज को सीधे नालों या जल स्रोतों में न छोड़ें और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की लापरवाही न केवल जल प्रदूषण को बढ़ाती है, बल्कि लंबे समय में मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
यह निरीक्षण अभियान दर्शाता है कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गंभीर हैं और इसके लिए ठोस कदम उठा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो गुरुग्राम में जल और पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

