संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी के 649वें पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर पंजाब के गांव खुरालगढ़ साहिब स्थित चरण छोह गंगा और तप स्थान श्री गुरु रविदास जी में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक हुए और गुरु साहिब से आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, सेवा और समरसता का वातावरण बना रहा।
प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने गुरुद्वारे में मत्था टेका, कीर्तन श्रवण किया और गुरु रविदास जी के उपदेशों को याद किया। इस अवसर पर विशेष अरदास में पंजाब की खुशहाली, तरक्की, अमन-शांति और भाईचारे की कामना की गई। श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरु रविदास जी का जीवन और उनके विचार आज भी समाज को समानता, प्रेम और मानवता का संदेश देते हैं।
खुरालगढ़ साहिब को गुरु रविदास जी की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चरण छोह गंगा में स्नान कर लोगों ने आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव किया और गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे परिसर में सेवा, लंगर और सत्संग की व्यवस्था की गई थी, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
धार्मिक विद्वानों और वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने जीवन से समाज में व्याप्त भेदभाव और ऊंच-नीच की भावना के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कर्म, भक्ति और मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताया। उनके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सैकड़ों साल पहले थे। वक्ताओं ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे गुरु रविदास जी के विचारों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।
प्रकाश पर्व के मौके पर कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सेवा कार्यों में भाग लिया। लंगर सेवा, चिकित्सा शिविर और साफ-सफाई जैसे कार्यों के जरिए लोगों ने सेवा भावना का परिचय दिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर पहुंचे गणमान्य व्यक्तियों ने भी गुरु रविदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रदेश की उन्नति, शांति और एकता के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती हमेशा से संतों और गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरित रही है और गुरु रविदास जी का संदेश इस परंपरा को और मजबूत करता है।
कुल मिलाकर, श्री गुरु रविदास जी का 649वां प्रकाश पर्व न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह समाज में एकता, भाईचारे और मानवता के मूल्यों को दोहराने का अवसर भी बना। श्रद्धालुओं ने इस पावन दिन को आस्था, सेवा और समर्पण के साथ मनाया और गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

