Sanjay Singh ने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा, गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ने की बात कही।
देश में बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव खत्म होते ही जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिसमें चुनाव के दौरान राहत का माहौल बनाया जाता है और बाद में कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।
संजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि घरेलू रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए अब रसोई का खर्च संभालना और मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और चुनावी राजनीति के बाद जनता को महंगाई का “तोहफा” दे रही है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके मुताबिक, इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और ढाबा संचालकों पर पड़ा है, जिनका कारोबार पहले ही कई चुनौतियों से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल आम आदमी बल्कि छोटे उद्यमियों के लिए भी दोहरी मार साबित हो रहा है।
संजय सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का हवाला देना केवल एक बहाना है। उनका दावा है कि सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने मांग की कि बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
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उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मजदूर, छात्र और छोटे व्यापारी आज इस महंगाई से परेशान हैं। चुनाव के समय किए गए वादे अब कहीं नजर नहीं आते और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।”
इस बयान के बाद महंगाई का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों का असर केवल घरेलू खर्च तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे आर्थिक ढांचे को प्रभावित करता है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह कीमतों को नियंत्रित करते हुए आम जनता को राहत देने के उपाय करे।
कुल मिलाकर, गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है, और यह मुद्दा आने वाले समय में संसद से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

