चंडीगढ़ में ERSS-112 संचार अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ईआरएसएस-112 के संचार अधिकारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संकट प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों को संवेदनशील और पेशेवर तरीके से संभालने के लिए तैयार करना था।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण
यह सत्र मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा संचालित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ब्रह्मदीप, डॉ. एम.पी. शर्मा और सिविल अस्पताल पंचकूला की मनोसामाजिक कार्यकर्ता अंकिता चौधरी ने अहम भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों ने अधिकारियों को संकट के समय सही संवाद, संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व से अवगत कराया।
क्या-क्या सिखाया गया
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण कौशल सिखाए गए, जिनमें शामिल हैं:
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कॉल के दौरान आत्महत्या और आत्म-क्षति के संकेतों की पहचान
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सक्रिय सुनने (Active Listening) और डी-एस्केलेशन तकनीक
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तनावग्रस्त व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग देना
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अवसाद, चिंता और तनाव जैसी मानसिक समस्याओं की समझ
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जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से त्वरित समन्वय
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर
इस प्रशिक्षण में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन आधारित सिमुलेशन और इंटरैक्टिव अभ्यास भी शामिल किए गए। इससे अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव मिला और उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
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आत्महत्या रोकथाम में अहम भूमिका
डॉ. ब्रह्मदीप ने कहा कि आपातकालीन कॉल रिसीव करने वाले अधिकारी आत्महत्या रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सही समय पर सही संवाद किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है।
प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया
प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने इसे बेहद उपयोगी बताया और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं और समाज में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हैं।
निष्कर्ष
ईआरएसएस-112 के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से न केवल आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे लोगों को समय पर सहायता मिल सकेगी, जो समाज के लिए एक सकारात्मक पहल है।

