धार के कुक्षी में विश्व कपास दिवस पर प्रशिक्षण आयोजित हुआ। 200 से अधिक किसानों ने HDPS तकनीक, उन्नत कपास किस्मों और आधुनिक खेती की जानकारी प्राप्त की।
विश्व कपास दिवस के अवसर पर धार जिले के कुक्षी विकासखंड में कपास उत्पादक किसानों के लिए एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय कपास उत्पादकता मिशन के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का आयोजन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, विकासखंड कुक्षी के सहयोग से साइमा (SIMA) कॉटन डेवलपमेंट एंड रिसर्च एसोसिएशन, कोयंबटूर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में किसानों को कपास की उन्नत किस्मों, आधुनिक उत्पादन तकनीकों और बेहतर कृषि प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य लंबे रेशे और अतिरिक्त लंबे रेशे (ELS) वाली कपास की खेती को प्रोत्साहित करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना तथा किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना था।
आधुनिक कृषि तकनीकों से बढ़ेगी कपास की पैदावार
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला धार के उप संचालक विजय चौरसिया ने किसानों को कपास की खेती में नवीन तकनीकों के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने उच्च घनत्व पौध रोपण प्रणाली (HDPS) और कम दूरी पर पौधे लगाने की तकनीक को अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि इस पद्धति में कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच 3 × 1 फीट की दूरी रखकर कपास की बुवाई करने की जानकारी दी गई। उचित तकनीक, फसल प्रबंधन और कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसान सीमित भूमि में भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार कृषि कार्य करने, संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने और मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। इन उपायों से खेती की लागत को नियंत्रित करने और गुणवत्तापूर्ण कपास उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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कपास की फसल में समन्वित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह
प्रशिक्षण के दौरान कपास की फसल को कीटों से सुरक्षित रखने के लिए समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को फसल की नियमित निगरानी, कीटों की पहचान और आवश्यकता के अनुसार उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और समय पर कृषि कार्य करने से कपास की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायता मिल सकती है। किसानों को स्थानीय परिस्थितियों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
शक्ति बीटी और सुरक्षा कपास की किस्मों की प्रदर्शनी
कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शक्ति बीटी और सुरक्षा कपास की उन्नत किस्मों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके माध्यम से किसानों को कपास की विभिन्न किस्मों और उनकी उत्पादन संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के तहत किसानों को शक्ति बीटी कपास के प्रदर्शन प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने खेत में अपनाई गई उत्पादन तकनीकों, पौधों के बीच उचित दूरी और उन्नत खेती की विधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
प्रदर्शन प्रक्षेत्र के अवलोकन से किसानों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिला। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों को समझने और अपनी खेती में उपयुक्त तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों ने लिया प्रशिक्षण में भाग
कुक्षी में आयोजित इस कार्यक्रम में साइमा कॉटन डेवलपमेंट एंड रिसर्च एसोसिएशन, कोयंबटूर के विपणन सलाहकार दिनेश गुप्ता, संस्था की सचिव एवं मुख्य कपास प्रजनक डॉ. एम. आशारानी, सहायक संचालक डी.एस. मौर्य और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कुक्षी अजय चौहान उपस्थित रहे।
इसके अलावा बीज विक्रेता सुनील पाटीदार और सोहन पाटीदार सहित विकासखंड के कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान कार्यक्रम में शामिल हुए।
किसानों को आधुनिक कपास उत्पादन से जोड़ने पर जोर
विश्व कपास दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को कपास की उन्नत खेती, बेहतर बीज किस्मों, पौध रोपण तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट नियंत्रण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को समझने, उत्पादन संबंधी चुनौतियों का समाधान खोजने और खेती की गुणवत्ता में सुधार के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

