धार जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लागू। नियम तोड़ने पर 15 हजार रुपये तक जुर्माना, कंबाइन हार्वेस्टर के साथ SMS या स्ट्रा रीपर अनिवार्य।
जिले में पर्यावरण संरक्षण, वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अपर जिला दंडाधिकारी संजीव केशव पांडेय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, खेतों में फसल अवशेष जलाना प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही, फसल कटाई के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) या स्ट्रा रीपर में से किसी एक मशीन का उपयोग करना अनिवार्य होगा। यह आदेश 6 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
कंबाइन हार्वेस्टर के साथ SMS या स्ट्रा रीपर लगाना जरूरी
जिला प्रशासन ने फसल कटाई के दौरान नरवाई प्रबंधन को अनिवार्य बनाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। अब जिले में संचालित होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) या स्ट्रा रीपर में से कोई एक मशीन होना आवश्यक है।
किसानों की भूसे की जरूरत को ध्यान में रखते हुए SMS के विकल्प के रूप में स्ट्रा रीपर के उपयोग की अनुमति दी गई है। जिला परिवहन अधिकारी और सहायक कृषि अभियांत्रिकी अधिकारी, धार को हार्वेस्टर संचालन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित उपकरणों के बिना कंबाइन हार्वेस्टर चलाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ता है असर
प्रशासन के अनुसार, खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचता है। नरवाई जलने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं और जैविक कार्बन की मात्रा में कमी आ सकती है। इससे भूमि की उर्वरता और लंबे समय तक फसल उत्पादन की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। किसानों से अपील की गई है कि वे नरवाई जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से उसका उचित प्रबंधन करें।
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नरवाई से किसान बढ़ा सकते हैं आमदनी, अपनाएं ये तरीके
फसल अवशेषों का सही उपयोग करके किसान खेती की लागत कम करने और अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने की दिशा में काम कर सकते हैं। नरवाई प्रबंधन के लिए कई उपयोगी विकल्प उपलब्ध हैं।
- मल्चिंग: फसल अवशेषों को खेत में बिछाकर मिट्टी की नमी बनाए रखने और भूमि संरक्षण में मदद ली जा सकती है।
- स्ट्रा रीपर से भूसा बनाना: नरवाई से पशुओं के लिए चारा तैयार किया जा सकता है। अतिरिक्त भूसे का विपणन करके आय भी प्राप्त की जा सकती है।
- हैप्पी सीडर और सुपर सीडर: उपयुक्त परिस्थितियों में बिना पारंपरिक जुताई के फसल अवशेषों के बीच अगली फसल की सीधी बुवाई की जा सकती है।
- बेलर, रैकर और चॉपर: इन कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों को एकत्र करने, छोटे टुकड़ों में काटने या बंडल बनाने में सहायता मिलती है।
- औद्योगिक उपयोग: एकत्रित फसल अवशेषों का उपयोग उपयुक्त औद्योगिक इकाइयों में ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है।
इन उपायों से फसल अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल संभव है। साथ ही, मिट्टी में जैविक पदार्थ बनाए रखने और खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नरवाई जलाने पर 2,500 से 15,000 रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति
जारी आदेश में नरवाई जलाने की घटनाओं पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूलने का प्रावधान बताया गया है। मध्य प्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग की अधिसूचना तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार, भूमि के रकबे के आधार पर प्रति घटना क्षतिपूर्ति राशि निर्धारित की गई है।
भूमि के रकबे के अनुसार निर्धारित राशि इस प्रकार है:
- दो एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 2,500 रुपये।
- दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ से कम भूमि: प्रति घटना 5,000 रुपये।
- पांच एकड़ से अधिक भूमि: प्रति घटना 15,000 रुपये।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 से संबंधित प्रावधानों के तहत फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों से लागू प्रावधानों के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूल की जाएगी।
कृषि विभाग और राजस्व अधिकारी करेंगे निगरानी
नरवाई प्रबंधन संबंधी आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, जिला धार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
यदि आदेश की किसी शर्त का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कृषि विकास अधिकारी और क्षेत्र के पटवारी संयुक्त रूप से जांच करेंगे। जांच के बाद प्रतिवेदन संबंधित तहसीलदार को सौंपा जाएगा।
इसके बाद संबंधित किसान को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा। सुनवाई और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तहसीलदार को सात दिवस के भीतर शास्ति लगाने के संबंध में उचित निर्णय लेना होगा।
आदेश का उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई
अपर जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत पारित किया गया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और 6 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने से बचें, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें और पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग दें।

