दिल्ली हाईकोर्ट ने आपत्तिजनक गीत ‘Volume 1’ को लेकर Honey Singh और Badshah को झटका देते हुए सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया।
संगीत जगत में हलचल मचाते हुए Delhi High Court ने रैप सॉन्ग ‘Volume 1’ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस गाने को तुरंत प्रभाव से सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए हैं। यह गाना मशहूर रैपर्स Yo Yo Honey Singh और Badshah के शुरुआती दौर के ग्रुप ‘Mafia Mundeer’ से जुड़ा हुआ बताया जाता है।
अदालत ने अपने आदेश में गाने के बोलों को बेहद आपत्तिजनक, अश्लील और महिलाओं के प्रति अपमानजनक करार दिया। न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती, खासकर तब जब यह इंटरनेट के माध्यम से हर आयु वर्ग के लोगों तक आसानी से पहुंच रही हो।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि गाने के बोल न केवल अशोभनीय हैं, बल्कि उनमें किसी प्रकार का सामाजिक या कलात्मक मूल्य भी नजर नहीं आता। न्यायाधीश ने यहां तक टिप्पणी की कि गाने का शीर्षक भी इतना आपत्तिजनक है कि उसे आदेश में दर्ज करना उचित नहीं समझा गया।
📲 सभी प्लेटफॉर्म से हटाने के आदेश
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस गाने के सभी संस्करण—चाहे वह ओरिजिनल हों, रीमिक्स या मॉडिफाइड—तुरंत हटाए जाएं। इसमें यूट्यूब, स्पॉटिफाई, गूगल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं। साथ ही, गाने से जुड़े अधिकार रखने वाले सभी व्यक्तियों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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📢 याचिका के बाद हुई कार्रवाई
यह मामला एक संगठन द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया, जिसमें मांग की गई थी कि इस गाने को सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया जाए। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि Yo Yo Honey Singh ने हाल ही में एक कॉन्सर्ट के दौरान इस गाने के कुछ हिस्से प्रस्तुत किए थे, जिससे विवाद और बढ़ गया।
🚨 समाज पर प्रभाव को लेकर चिंता
अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री महिलाओं को अपमानित करती है और उन्हें मजाक का विषय बनाती है। साथ ही, यह भी चिंता जताई गई कि ऐसे गाने नाबालिगों के लिए भी सुलभ हैं, जो सामाजिक मूल्यों के लिए हानिकारक हो सकता है।
📅 अगली सुनवाई तय
कोर्ट ने इस मामले में कलाकारों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की है। साथ ही, याचिकाकर्ता को यह अधिकार दिया गया है कि यदि गाने के अन्य लिंक या संस्करण सामने आते हैं, तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के साथ साझा किया जा सकता है, ताकि उन्हें भी हटाया जा सके।
सरकार और संबंधित एजेंसियों ने अदालत को आश्वस्त किया है कि इस आदेश का सख्ती से पालन किया जाएगा और किसी भी शेष सामग्री को तुरंत हटाया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है, जहां कला और मर्यादा के बीच सीमाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता सामने आई है।

