दिल्ली पीएम-उदय योजना 2026 के तहत ₹65 करोड़ की दृष्टि परियोजना मंजूर। 13 जिलों में नए सेल बनेंगे और GIS तकनीक से संपत्तियों का सर्वे व मैपिंग होगी।
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। पीएम-उदय योजना के तहत संपत्ति से जुड़े अधिकारों की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ₹65 करोड़ की दृष्टि परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के माध्यम से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके संपत्तियों का सर्वे, डिजिटल मैपिंग और रिकॉर्ड व्यवस्थित करने का काम किया जाएगा।
परियोजना के तहत दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम-उदय सेल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा मुख्यालय में भी एक अलग शाखा बनाई जाएगी। इससे संपत्ति संबंधी मामलों की निगरानी और दस्तावेजों की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पीएम-उदय योजना के तहत क्या बदलेगा?
पीएम-उदय योजना का उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले पात्र लोगों को उनकी संपत्तियों से जुड़े अधिकार दिलाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। दृष्टि परियोजना के तहत जियोस्पेशियल तकनीक और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करके संपत्तियों का विस्तृत सर्वे और मैपिंग की जाएगी।
नई व्यवस्था से संपत्तियों की स्थिति, नक्शों और संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी। इससे सर्वेक्षण और दस्तावेजों की जांच में लगने वाला समय कम करने तथा लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
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₹65 करोड़ की परियोजना में केंद्र और दिल्ली सरकार का कितना योगदान?
दृष्टि परियोजना के लिए कुल ₹65 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों की भागीदारी होगी।
- केंद्र सरकार का योगदान: ₹52 करोड़
- दिल्ली सरकार का योगदान: ₹13 करोड़
- कुल परियोजना लागत: ₹65 करोड़
केंद्र की ओर से मिलने वाली राशि आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास निधि के माध्यम से अनुदान के रूप में दी जाएगी। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, यह राशि चार किस्तों में जारी की जाएगी। हालांकि, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद की स्थिति में लागू शर्तों के अनुसार भुगतान एक किस्त में भी किया जा सकता है।
दिल्ली के 13 जिलों में बनेंगे पीएम-उदय सेल
परियोजना के तहत दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम-उदय सेल स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही मुख्यालय में एक अलग शाखा बनाई जाएगी। इन इकाइयों के माध्यम से जिला स्तर पर संपत्ति सर्वेक्षण, रिकॉर्ड प्रबंधन और संबंधित मामलों की निगरानी को व्यवस्थित किया जाएगा।
परियोजना की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को सौंपी गई है। जिला स्तर पर व्यवस्था मजबूत होने से स्थानीय स्तर पर संपत्ति संबंधी मामलों की प्रगति पर नजर रखने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
डीडीए, राजस्व विभाग और MCD की रहेगी अहम भूमिका
पीएम-उदय योजना के क्रियान्वयन में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), राजस्व विभाग और दिल्ली नगर निगम (MCD) की महत्वपूर्ण भूमिका है। संपत्तियों का सर्वे, मैपिंग और दस्तावेजों का समन्वित प्रबंधन इन एजेंसियों के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकता है।
GIS आधारित व्यवस्था से संपत्तियों से संबंधित जानकारी को बेहतर ढंग से दर्ज करने और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे योजना के अंतर्गत आवेदन और दस्तावेजी प्रक्रिया को गति देने का लक्ष्य है।
अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को क्या फायदा होगा?
दृष्टि परियोजना का प्रमुख उद्देश्य पीएम-उदय योजना के तहत संपत्ति अधिकार से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। डिजिटल सर्वे और मैपिंग से संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करने तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया को सुगम बनाने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, परियोजना की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि सभी निवासियों को स्वतः संपत्ति का अधिकार मिल जाएगा। लाभ संबंधित पात्रता, दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।

