ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजार में गिरावट, वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, वहीं शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान पर हमला कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ गया।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 3.31 प्रतिशत बढ़कर 97.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.2 प्रतिशत उछलकर 98.38 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया। इससे पहले युद्धविराम की खबरों के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन अब अनिश्चितता के चलते बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल रही है।
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तेल की कीमतों में इस उछाल का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई बाजारों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारतीय शेयर बाजार भी लाल निशान पर खुला। दोपहर तक सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक गिरकर 77,000 के आसपास पहुंच गया, वहीं निफ्टी भी 100 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है।
इस बीच, व्हाइट हाउस ने ईरान से अपील की है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोले, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित न हो। हालांकि, ईरान का कहना है कि क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह रोकना जरूरी है। इजरायल ने साफ किया है कि लेबनान संघर्ष-विराम समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान इस पर असहमति जता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की स्थिति पर दुनिया भर की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इसका सीधा असर ऊर्जा बाजार और वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है।

