ईरान-इजराइल तनाव बढ़ा तो कच्चे तेल के दाम 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों को लेकर वैश्विक बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी टकराव अब दूसरे दौर की शांति वार्ता पर टिक गया है। अगर यह वार्ता सफल होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन अगर बातचीत विफल रही और युद्ध लंबा खिंचता है, तो कीमतें 200 से 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा समय में भले ही कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा हो, लेकिन जियो-पॉलिटिकल तनाव का असर बाजार पर कभी भी दिखाई दे सकता है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी और अमेरिका द्वारा कड़े प्रतिबंधों के ऐलान ने सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, ऐसे में इसमें किसी भी प्रकार की बाधा कीमतों में तेज उछाल ला सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष गर्मियों तक जारी रहता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की मांग और सप्लाई का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें असामान्य स्तर तक बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे मांग में गिरावट आए। कुछ रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया गया है कि ब्रेंट क्रूड 200 से 250 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जो इतिहास के उच्चतम स्तर से भी कहीं ज्यादा होगा।
मैक्वेरी और S&P Global जैसे संस्थानों ने भी चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो बाजार में बड़ा झटका देखने को मिल सकता है। S&P Global Energy के विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वैश्विक सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा बाधित होता है, तो कीमतों में तेज उछाल लगभग तय है। वहीं, सऊदी अरब के ऊर्जा अधिकारियों ने भी अनुमान जताया है कि कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
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एयरलाइन सेक्टर पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। यूनाइटेड एयरलाइंस के CEO ने संकेत दिया है कि अगर तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनी के ईंधन खर्च में अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। इससे वैश्विक यात्रा और पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो अमेरिकी WTI क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि कुछ ही समय पहले यह 110-115 डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका था, जिससे यह साफ होता है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम साबित होंगे। अगर शांति वार्ता सफल होती है, तो कीमतें 70 डॉलर तक भी गिर सकती हैं। लेकिन अगर तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर डालेंगी।

