मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री पद का दावा किया है। साथ ही, वे भविष्य की राजनीतिक योजनाओं पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उनका कहना था कि मैं दिल से योगी हूँ और राजनीति मेरा पूरा जीवन नहीं है। मैं राजनीति में हमेशा के लिए नहीं आया हूं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा करने के लिए हूँ। मेरी पार्टी भाजपा ने मुझे दी गई जिम्मेदारियों को पूरा कर रहा हूँ।
उन्होंने पीटीआई को दिए गए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि राजनीति में मेरी अवधि सीमित है। मैं हमेशा के लिए राजनीति में नहीं हूं। ध्यान दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह लेने के लिए चल रहे बहस में योगी को उनके समर्थकों ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया है। 30 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी के संघ मुख्यालय जाने के बाद ये बहसें और तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है।
शिवसेना के नेता संजय राउत ने भी इसकी पुष्टि की है। उनका कहना था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मोदी ही देश का अगला प्रधानमंत्री होंगे। हमारी संस्कृति में पिता का उत्तराधिकारी नहीं कहा जाता।
केंद्रीय नेतृत्व से सीएम हूँ
योगी ने केंद्रीय नेतृत्व से मतभेद होने के सवाल को खारिज करते हुए कहा कि मुझे उनसे कोई मतभेद नहीं है। मैं यहां नहीं बैठा होता अगर कोई मतभेद होता। मैं भी खुद को विशिष्ट नहीं समझता। योगी ने हैरान होकर कहा कि वे नहीं जानते कि मतभेद कहां से आता है। मैं सिर्फ पार्टी के लिए यहां बैठा हूँ। क्या मैं केंद्रीय नेताओं से मतभेद करके यहां बैठा रह सकता हूँ?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति में धर्म का एकीकरण अस्वीकार्य नहीं है। हमने धर्म को कुछ जगहों पर सीमित कर दिया और राजनीति को कुछ लोगों के लिए छोड़ दिया। इससे समस्याएं होती हैं। राजनीति का लक्ष्य व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति नहीं, बल्कि समाज की भलाई करना है। परमार्थ भी धर्म का उद्देश्य है। जब धर्म स्वार्थ की पूर्ति के लिए प्रयोग किया जाता है, तो यह कठिन होता है, लेकिन परमार्थ का उद्देश्य होने पर धर्म प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
संसदीय बोर्ड का काम है टिकट बाँटना
मुख्यमंत्री ने पार्टी में टिकट वितरण में मुख्यमंत्री की भूमिका के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि टिकट वितरण संसदीय बोर्ड करता है। उम्मीदवारों के नाम पर सार्वजनिक चर्चा संसदीय बोर्ड में सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में होती है। आपस में गहन विचार-विमर्श के बाद ही प्रत्याशी के नाम निर्धारित होते हैं; इसमें किसी व्यक्ति के चुनाव में भाग लेने की बात नहीं होती। संसदीय बोर्ड के सदस्यों ने सभी नामों को गहराई से जांचने के बाद ही सूची बनाई है।
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