बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिल्पा शेट्टी की छवि का गलत इस्तेमाल करने वाले डीपफेक और AI कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए, निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया।
बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के नाम और छवि के दुरुपयोग पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स और एआई प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक और फर्जी कंटेंट तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं, जो अभिनेत्री की पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।
28 संगठनों पर कार्रवाई
न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने अपने आदेश में कहा कि करीब 28 संगठनों को शिल्पा शेट्टी के नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोका जाए। कोर्ट ने पाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर उत्पाद बेच रहे थे, जिससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कहा कि बिना अनुमति किसी सेलिब्रिटी की पहचान का उपयोग करना पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि
“किसी व्यक्ति की लोकप्रियता यह अधिकार नहीं देती कि उसकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाए।”
डीपफेक और AI पर चिंता
कोर्ट ने खास तौर पर डीपफेक और AI से बनाए गए आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, इस तरह के कंटेंट से व्यक्ति की छवि, गरिमा और प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
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आर्टिकल 21 का उल्लंघन
अदालत ने कहा कि इस तरह का दुरुपयोग संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। चाहे कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में हो, फिर भी उसकी पहचान की सुरक्षा जरूरी है।
8 दिन में हटाना होगा कंटेंट
कोर्ट ने सभी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि
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शिकायत मिलने के 8 दिनों के भीतर सभी लिंक और कंटेंट हटाए जाएं
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अगर किसी प्लेटफॉर्म को आपत्ति है, तो वह अदालत का रुख कर सकता है
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए चेतावनी
इस फैसले को डिजिटल दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि AI टूल्स का दुरुपयोग रोकने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म्स की भी है और ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह फैसला न सिर्फ सेलिब्रिटीज बल्कि आम लोगों के लिए भी अहम है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में पहचान और निजता की सुरक्षा कानून के दायरे में पूरी तरह सुरक्षित है।

