पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खटकड़ कलां में शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देकर युवाओं से उनके विचार अपनाने का आह्वान किया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
शहीदों के बलिदान को याद रखने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आज़ादी के लिए शहीदों ने जो बलिदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को इन महान क्रांतिकारियों के आदर्शों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
भगत सिंह की वीरता का उल्लेख
भगवंत मान ने भगत सिंह के जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि जिस उम्र में आज के युवा छोटी-छोटी चीजों की मांग करते हैं, उस उम्र में भगत सिंह देश की आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
- 18–19 साल की उम्र में ही स्वतंत्रता के लिए समर्पण
- 23 वर्ष की उम्र में शहादत
- जीवनभर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा
“मेरी मौत पर मत रोओ…” संदेश को दोहराया
मुख्यमंत्री ने भगत सिंह के प्रसिद्ध शब्दों को दोहराते हुए कहा:
“मेरी मौत पर मत रोओ, मेरे विचारों को बचाओ”
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भगत सिंह के जीवन और विचारधारा को पढ़ें और अपने बच्चों को भी इसके बारे में जागरूक करें।
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युवाओं को दिया विशेष संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि:
- युवाओं को देशभक्ति और जिम्मेदारी को समझना चाहिए
- भगत सिंह का साहस और निस्वार्थ सेवा आज भी प्रासंगिक है
- “इंकलाब जिंदाबाद” केवल नारा नहीं, बल्कि एक विचारधारा है
प्रेरणादायक बना कार्यक्रम
खटकड़ कलां में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि समाज में एकता, जिम्मेदारी और प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देने का संदेश भी देता है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह संदेश साफ करता है कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए उनके विचारों को अपनाना जरूरी है। खटकड़ कलां का यह आयोजन युवाओं को देशभक्ति और समर्पण की नई प्रेरणा देता है।

