बैतूल में कम बारिश के चलते कृषि विभाग किसानों को सूखा प्रबंधन, फसल परिवर्तन और जल संरक्षण के लिए जागरूक कर रहा है। चना, मसूर और सरसों की खेती अपनाने की सलाह।
जिले में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सूखे से निपटने, पानी बचाने और रबी सीजन में वैकल्पिक फसलों की खेती करने के लिए जागरूक करना शुरू कर दिया है। इसके लिए विभिन्न विकासखंडों के गांवों में रात्रि चौपाल और किसान संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में किसानों को गेहूं और गन्ने के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है।
कृषि विभाग के अनुसार, चना, मसूर, सरसों, अलसी और कुसुम जैसी फसलें सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में उपयोगी विकल्प हो सकती हैं। फसल का चयन खेत की स्थिति, उपलब्ध नमी और सिंचाई संसाधनों को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है।
अंधारियां गांव में रात्रि चौपाल, किसानों को दी योजनाओं की जानकारी
विकासखंड आमला की ग्राम पंचायत अंधारियां में 12 अक्टूबर को रात्रि चौपाल आयोजित की गई। इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कम बारिश की स्थिति में फसल चयन और सूखा प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी।
किसानों को गेहूं की जगह चना, मसूर, सरसों और अलसी जैसी फसलें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना, ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना और सोलर पंप सहित कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने किसानों से उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
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युवाओं को भी बनाया जा रहा जागरूकता अभियान का हिस्सा
किसानों तक फसल परिवर्तन का संदेश पहुंचाने के लिए शाहपुर कॉलेज में आयोजित युवा रोजगार सम्मेलन का भी उपयोग किया गया। यहां किसानों के बच्चों और जनप्रतिनिधियों को कम वर्षा के दौरान खेती की रणनीति बदलने के महत्व के बारे में बताया गया।
युवाओं से अपील की गई कि वे अपने परिवार के किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल चुनने के लिए प्रेरित करें। विशेष रूप से इस रबी सीजन में गेहूं और गन्ने के बजाय चना, मसूर और सरसों जैसी वैकल्पिक फसलों पर विचार करने की सलाह दी गई।
झिटूढाना में सूखा प्रबंधन और जीरो टिलेज तकनीक पर मार्गदर्शन
विकासखंड भीमपुर के अंतर्गत ग्राम रतनपुर के झिटूढाना में आयोजित रात्रि चौपाल में किसानों को सूखा प्रबंधन, जल संरक्षण और उपयुक्त फसल चयन की जानकारी दी गई। उप संचालक कृषि ने किसानों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप खेती की योजना तैयार करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान जीरो टिलेज तकनीक, ई-विकास प्रणाली, पशु चारा प्रबंधन तथा चना, सरसों और मसूर की बुवाई से संबंधित तकनीकी जानकारी भी साझा की गई। किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती में अनावश्यक खर्च कम करने के उपायों से अवगत कराया गया।
जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलें बन सकती हैं मददगार
बैतूल जिले में कृषि विभाग की यह पहल कम बारिश से उत्पन्न चुनौतियों के बीच किसानों को व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। वैकल्पिक फसलों का चयन, सिंचाई जल का विवेकपूर्ण उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना सूखे के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है।
कृषि विभाग का प्रयास है कि किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल योजना बनाएं, उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ लें और सीमित जल संसाधनों के बीच रबी फसलों की बेहतर तैयारी कर सकें।

