लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम आयोजित, वन संरक्षण, कार्बन क्रेडिट और पर्यावरण संतुलन पर विशेष जोर।
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित ‘अरण्य समागम’ में वन संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन और अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर गहन चर्चा की गई। “वन एवं अर्थव्यवस्थाएं” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय वानिकी संवाद में देशभर से विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया।
वन संरक्षण पर सरकार की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वन संरक्षण जीव सृष्टि के लिए अत्यंत आवश्यक है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
“माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:” के मूल मंत्र को अपनाते हुए सरकार पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
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सम्मान और सराहना का मंच बना समागम
इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं:
- वन विभाग की कॉफी टेबल बुक का विमोचन
- मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहस दिखाने वाले बच्चों का सम्मान
- उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित किया गया
- सामाजिक संगठनों को भी सराहना दी गई
कार्बन क्रेडिट वितरण पर जोर
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कार्बन क्रेडिट चेक का वितरण भी किया गया, जो सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
देशभर से जुटे प्रकृति प्रेमी
समारोह में विभिन्न राज्यों से आए वन विभाग के अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया।
इस दौरान सभी ने वन संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर आयोजित यह समागम न केवल पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वन और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक हैं।
यह आयोजन भविष्य में सतत विकास और हरित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 🌱

