एनाट्टो (सिंदूर पौधा) प्राकृतिक रंग का प्रमुख स्रोत है। जानें इसकी खेती, बिक्सिन-नॉरबिक्सिन, खाद्य, कॉस्मेटिक और औषधीय उपयोग।
रंग हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। कपड़ों से लेकर भोजन, सौंदर्य प्रसाधन और कई औद्योगिक उत्पादों तक रंगों का इस्तेमाल होता है। हालांकि, कृत्रिम रंगों के पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों के कारण प्राकृतिक रंगों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एनाट्टो (Annatto) यानी Bixa orellana एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक रंग स्रोत के रूप में सामने आता है।
इसे कई जगह सिंदूर पौधा, लिपस्टिक ट्री या अचियोटे के नाम से भी जाना जाता है। इसके बीजों की बाहरी परत से लाल, नारंगी और पीले रंग के प्राकृतिक पिगमेंट प्राप्त किए जाते हैं। इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के साथ-साथ कपड़ा, कॉस्मेटिक और अन्य उद्योगों में किया जाता है।
प्राकृतिक रंगों की बढ़ती जरूरत
दुनिया में लंबे समय से रंगों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में होता रहा है। प्राचीन सभ्यताओं में पौधों, खनिजों और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से रंग तैयार किए जाते थे। भारत में भी प्राकृतिक रंगों और वनस्पतियों से रंगाई की परंपरा बेहद पुरानी रही है।
देश में अनेक पौधों की प्रजातियों से प्राकृतिक रंग प्राप्त किए जाते हैं। पौधों के अलग-अलग हिस्सों जैसे जड़, तना, पत्तियां, छाल, फूल और फल से रंग निकालने की परंपरा रही है।
आज सिंथेटिक डाई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, लेकिन पर्यावरण-अनुकूल और जैव-अवक्रमणीय विकल्पों की मांग ने प्राकृतिक रंगों पर दोबारा ध्यान केंद्रित किया है।
क्या है एनाट्टो पौधा?
एनाट्टो का वैज्ञानिक नाम Bixa orellana है। यह Bixaceae परिवार से संबंधित पौधा है। इसके बीजों पर मौजूद लाल-नारंगी रंग का पिगमेंट इसे खास बनाता है।
पौधे को आमतौर पर Annatto, Achiote और Lipstick Tree के नाम से जाना जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसके बीजों से प्राप्त रंग का इस्तेमाल शरीर और होंठों को रंगने के लिए भी पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।
यह सामान्यतः सदाबहार झाड़ी या छोटे पेड़ के रूप में विकसित होता है और इसकी ऊंचाई लगभग 2 से 8 मीटर तक हो सकती है। पौधे के फल कैप्सूल जैसे होते हैं, जिनके अंदर कई छोटे बीज पाए जाते हैं।
एनाट्टो में कौन सा प्राकृतिक रंग पाया जाता है?
एनाट्टो के बीजों में मुख्य रूप से बिक्सिन (Bixin) और नॉरबिक्सिन (Norbixin) नामक कैरोटेनॉयड पिगमेंट पाए जाते हैं।
बिक्सिन बीजों के नारंगी-लाल रंग के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार होता है। वहीं नॉरबिक्सिन बिक्सिन से संबंधित एक अन्य पिगमेंट है, जिसका इस्तेमाल अलग-अलग खाद्य और औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाता है। इन्हीं प्राकृतिक पिगमेंट के कारण एनाट्टो से पीले, नारंगी और लाल रंग के विभिन्न शेड तैयार किए जा सकते हैं।
खाद्य उद्योग में एनाट्टो का इस्तेमाल
एनाट्टो का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग खाद्य उद्योग में किया जाता है। इसके प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल विभिन्न खाद्य उत्पादों को आकर्षक रंग देने के लिए किया जाता है।
विशेष रूप से डेयरी उत्पादों में इसका इस्तेमाल उल्लेखनीय है। मक्खन, चीज और आइसक्रीम जैसे उत्पादों में एनाट्टो आधारित रंग का प्रयोग किया जा सकता है।
इसके अलावा कुछ खाद्य उत्पादों, सूप, चावल और अन्य तैयार खाद्य पदार्थों में भी इसका उपयोग किया जाता है। प्राकृतिक खाद्य रंगों की मांग बढ़ने के साथ एनाट्टो का व्यावसायिक महत्व भी बढ़ा है।
कॉस्मेटिक और सौंदर्य उत्पादों में उपयोग
एनाट्टो को ‘लिपस्टिक ट्री’ कहे जाने की एक वजह इसके बीजों से मिलने वाला प्राकृतिक लाल रंग है। इसके पिगमेंट का उपयोग कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों में रंग देने के लिए किया जाता है।
लिपस्टिक के अलावा बालों से जुड़े उत्पादों, हेयर ऑयल और कुछ अन्य सौंदर्य प्रसाधनों में भी एनाट्टो आधारित रंग का उपयोग किया जा सकता है।
कपड़ा उद्योग में प्राकृतिक डाई
एनाट्टो प्राकृतिक डाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके पिगमेंट का उपयोग कपास और रेशम जैसे फाइबर को रंगने के लिए किया जा सकता है।
फाइबर, धागे और तैयार कपड़े के अलग-अलग चरणों में रंगाई की तकनीक अपनाई जा सकती है। पर्यावरण-अनुकूल फैशन और प्राकृतिक रंगों की बढ़ती मांग के कारण एनाट्टो जैसे पौधों की उपयोगिता बढ़ रही है।
एनाट्टो की खेती के लिए कैसी जलवायु चाहिए?
एनाट्टो मूल रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का पौधा है। गर्म और आर्द्र वातावरण में इसकी अच्छी वृद्धि होती है। इसे सामान्यतः ठंढ से मुक्त क्षेत्र और पर्याप्त धूप की आवश्यकता होती है।
पौधे के बेहतर विकास के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। गहरी और जैविक पदार्थों से समृद्ध मिट्टी में पौधे का विकास बेहतर हो सकता है।
उपयुक्त परिस्थितियों में इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है। इसकी खेती का क्षेत्र और उत्पादकता स्थानीय जलवायु, मिट्टी तथा प्रबंधन पर निर्भर करती है।
एनाट्टो की कटाई कैसे होती है?
एनाट्टो के फलों की कटाई फलियों की परिपक्वता के आधार पर की जाती है। जब कैप्सूल सूखने लगते हैं और उनमें दरारें दिखाई देने लगती हैं, तब कटाई का समय माना जाता है।
फलियों को पौधे से अलग करके कुछ दिनों तक छायादार स्थान पर सुखाया जाता है। इसके बाद बीजों को फलियों से निकालकर अलग किया जाता है।
साफ किए गए बीजों को सूखे और ठंडे स्थान पर उचित तरीके से संग्रहित करना जरूरी होता है, ताकि उनकी गुणवत्ता और रंगद्रव्य की मात्रा बेहतर बनी रहे।
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एनाट्टो से कितनी उपज मिल सकती है?
एनाट्टो की उपज पौधे की उम्र, किस्म, जलवायु और खेती प्रबंधन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। उपलब्ध कृषि अध्ययनों में उम्र बढ़ने के साथ पौधों की बीज उपज में वृद्धि दर्ज की गई है।
बीजों में बिक्सिन की मात्रा भी अलग-अलग जीनोटाइप और उत्पादन परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए व्यावसायिक खेती में अच्छी गुणवत्ता वाले और अधिक पिगमेंट वाले पौधों का चयन महत्वपूर्ण हो जाता है।
एनाट्टो के अन्य उपयोग
एनाट्टो केवल खाद्य रंग तक सीमित नहीं है। इसके कई अन्य उपयोग भी बताए जाते हैं।
- सजावटी पौधा: इसे बगीचों और जीवित बाड़ के रूप में लगाया जा सकता है।
- सूखे फूल: इसकी सूखी फलियों वाली शाखाओं का उपयोग सजावटी व्यवस्था में किया जाता है।
- फाइबर: पौधे की छाल से मिलने वाले रेशे का उपयोग रस्सी और सुतली बनाने में किया जा सकता है।
- पशु आहार: पिगमेंट निकालने के बाद बचा बीज अवशेष कुछ परिस्थितियों में फीड सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- औद्योगिक उपयोग: प्राकृतिक पिगमेंट का इस्तेमाल विभिन्न रंग आधारित उत्पादों में किया जा सकता है।
औषधीय उपयोग को लेकर क्या जानकारी है?
एनाट्टो का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। पौधे के विभिन्न हिस्सों में मौजूद जैव-सक्रिय यौगिकों पर वैज्ञानिक शोध भी हुआ है।
बिक्सिन जैसे कैरोटेनॉयड यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े गुणों का अध्ययन किया गया है। हालांकि, किसी बीमारी के इलाज या स्वास्थ्य समस्या में एनाट्टो का इस्तेमाल करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।
प्राकृतिक रंगों के सामने क्या हैं चुनौतियां?
प्राकृतिक रंग पर्यावरण के लिहाज से आकर्षक विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनके बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल में कई चुनौतियां मौजूद हैं।
इनमें रंग की स्थिरता, सीमित रंग विकल्प, कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन की लागत, डाई निकालने की प्रक्रिया, मानकीकरण और अलग-अलग बैच में रंग की गुणवत्ता का अंतर शामिल है।
इसके अलावा कुछ प्राकृतिक रंगों को कपड़े पर लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए विशेष तकनीक की आवश्यकता होती है। बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए लगातार समान गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध कराना भी चुनौती है।
प्राकृतिक रंगों का भविष्य
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ उत्पादन पर बढ़ते जोर के बीच प्राकृतिक रंगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। एनाट्टो जैसे पौधे खाद्य, कपड़ा और कॉस्मेटिक उद्योगों को प्राकृतिक पिगमेंट उपलब्ध कराने में योगदान दे सकते हैं।
हालांकि, प्राकृतिक रंगों को सिंथेटिक रंगों का व्यापक विकल्प बनाने के लिए बेहतर प्रसंस्करण तकनीक, मानकीकरण, अनुसंधान और किसानों के लिए लाभकारी बाजार व्यवस्था जरूरी होगी।
भारत में एनाट्टो पर हो रहा काम
भारत में कृषि और वनस्पति अनुसंधान से जुड़े संस्थानों द्वारा एनाट्टो के बेहतर जननद्रव्य, उत्पादन, कटाई के बाद की प्रक्रिया और औद्योगिक उपयोग पर अध्ययन किया जा रहा है।
वन महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान, मेट्टुपालयम में भी एनाट्टो के प्राकृतिक रंग स्रोत के रूप में विकास और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े कार्य किए गए हैं।
5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में एनाट्टो का पौधा लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। यह पौधा गुजरात के कच्छ की महिलाओं के एक समूह की ओर से भेंट किया गया था।

