Akkare Kottiyoor Shiva Temple एक प्राचीन शिव मंदिर है जो साल में केवल 28 दिन दर्शन के लिए खुलता है। जानें मंदिर का पौराणिक इतिहास, वैशाख महोत्सव और विशेष अनुष्ठानों के बारे में।
Akkare Kottiyoor Shiva Temple, केरल के प्राचीनतम और सबसे पवित्र शिव मंदिरों में से एक है, जो अपनी धार्मिक परंपराओं और साल में सिर्फ 28 दिनों के लिए दर्शन के लिए खुलने के कारण खास पहचान रखता है। यह मंदिर न सिर्फ पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि इसका वैशाख महोत्सव पूरे दक्षिण भारत में श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव बन चुका है।
कोट्टियूर मंदिर का पौराणिक इतिहास
केरल के कन्नूर जिले में स्थित कोट्टियूर मंदिर की मान्यता माता सती और भगवान शिव की कथा से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब प्रजापति दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, और माता सती ने आत्मदाह किया, तब वह यज्ञ स्थल इसी क्षेत्र में स्थित माना जाता है। यहीं से इस क्षेत्र को “कोट्टियूर” नाम मिला, जिसका अर्थ है “यज्ञ की भूमि”।
माना जाता है कि यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू (स्वतः प्रकट) है, जो एक ऊँचे प्राकृतिक मंच पर स्थापित है, और इसे नदी के पत्थरों से घिरा हुआ माना जाता है।
अक्कारे और इक्कारे कोट्टियूर मंदिर का महत्व
कोट्टियूर में दो मुख्य मंदिर स्थित हैं:
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अक्कारे कोट्टियूर मंदिर: भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर सिर्फ साल में एक बार, 28 दिनों के लिए वैशाख मास में दर्शन के लिए खोला जाता है।
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इक्कारे कोट्टियूर मंदिर: यह मंदिर पूरे वर्ष खुला रहता है और यहां पर भी श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
इन दोनों मंदिरों के बीच बहती है बावली नदी, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती है।
वैशाख महोत्सव: 28 दिनों का दिव्य आयोजन
Akkare Kottiyoor Siva Temple का वैशाख महोत्सव हर साल भारी श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव अनोखे अनुष्ठानों से शुरू और समाप्त होता है:
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नेय्यट्टम (घी स्नान): भगवान शिव को शुद्ध घी से स्नान कराया जाता है।
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एलेनीरट्टम (नारियल जल स्नान): अंतिम दिन भगवान को कोमल नारियल जल से स्नान कराया जाता है।
कहा जाता है कि इस अनुष्ठान की विधियां आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थीं।
मंदिर कैसे पहुँचे?
कोट्टियूर मंदिर कन्नूर जिले में स्थित है और यहाँ आप कन्नूर रेलवे स्टेशन या कोझिकोड एयरपोर्ट के माध्यम से पहुंच सकते हैं। वैशाख महोत्सव के दौरान विशेष बस सेवाएं और भक्तों के लिए रुकने की सुविधाएं राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं।
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