Akanksha Puri ने पैठणी साड़ी और बिकिनी ब्लाउज विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को जवाब दिया, कहा— फैशन डिजाइनर के विजन पर था भरोसा।
बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की चर्चित एक्ट्रेस Akanksha Puri इन दिनों अपने एक खास फैशन लुक को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में ‘बॉम्बे टाइम्स फैशन वीक’ में उनके पैठणी साड़ी और बिकिनी ब्लाउज के कॉम्बिनेशन ने सोशल मीडिया पर जमकर बहस छेड़ दी। अब इस पूरे विवाद पर आकांक्षा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स को सधा हुआ लेकिन करारा जवाब दिया है।
दरअसल, फैशन वीक के दौरान आकांक्षा पुरी ने पारंपरिक महाराष्ट्रियन पैठणी साड़ी को एक मॉडर्न ट्विस्ट देते हुए बिकिनी स्टाइल ब्लाउज के साथ पहना था। इस यूनिक लुक ने जहां कई लोगों का ध्यान खींचा, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए आलोचना भी शुरू कर दी।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आकांक्षा पुरी ने साफ कहा कि वह ट्रोलिंग से ज्यादा प्रभावित नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “जहां तारीफ होती है, वहां ट्रोलिंग भी होती है। मैं पॉजिटिविटी पर फोकस करती हूं और नेगेटिव कमेंट्स को इग्नोर करना पसंद करती हूं।”
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एक्ट्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लुक पूरी तरह उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि मशहूर फैशन डिजाइनर Rohit Verma का विजन था। उन्होंने कहा, “यह रोहित वर्मा का क्रिएशन था। मुझे उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा है। एक कलाकार के तौर पर मैंने उनके विजन को सम्मान दिया और कॉन्फिडेंस के साथ कैरी किया।”
आकांक्षा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस का रुख बदलता नजर आया। कई यूजर्स ने उनके आत्मविश्वास और पेशेवर रवैये की तारीफ की, जबकि कुछ ने फैशन में प्रयोग को समय की जरूरत बताया।
वर्क फ्रंट की बात करें तो आकांक्षा पुरी इन दिनों अपने नए म्यूजिक वीडियो ‘साड़ी फरमाइश’ को लेकर भी चर्चा में हैं, जिसमें उनके साथ Aashmit Patel नजर आए हैं। यह गाना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस को काफी पसंद आ रहा है। इसके अलावा वह जल्द ही भोजपुरी सुपरस्टार Khesari Lal Yadav के साथ भी स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी।
कुल मिलाकर, आकांक्षा पुरी का यह बयान साफ करता है कि आज के दौर में फैशन केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति और क्रिएटिविटी का भी माध्यम है। उनके इस विवाद ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या फैशन में प्रयोग को स्वीकार करना चाहिए या परंपराओं के दायरे में ही सीमित रहना चाहिए।

