हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों की कृषि कॉन्फ्रेंस में किसानों की आय, फसल विविधीकरण, बागवानी, कृषि सुधार, निर्यात और खाद्य सुरक्षा पर चर्चा हुई।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन में केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, किसानों की आय, डिजिटल कृषि, बागवानी, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, कृषि निर्यात और खाद्य सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे।
इस क्षेत्रीय सम्मेलन में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु के साथ केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों की भागीदारी रही। सरकार के मुताबिक, सम्मेलन का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के आधार पर कृषि के लिए रणनीति तैयार करना और राज्यों के सफल प्रयोगों को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाना है।
क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार कृषि योजना पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। अलग-अलग राज्यों की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था और फसल पैटर्न अलग होने के कारण क्षेत्रीय स्तर पर कृषि योजनाओं पर चर्चा करने की जरूरत बताई गई।
सम्मेलन में राज्यों की सफल कृषि पहलों को साझा करने और उन्हें अन्य क्षेत्रों में अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर, वैल्यू एडिशन और जलवायु-अनुकूल खेती जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर फोकस
कृषि क्षेत्र के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आजीविका को मजबूत करने और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है। सम्मेलन में फसल विविधीकरण, दालों और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता तथा प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
इसके साथ ही संतुलित उर्वरक प्रबंधन और नकली खाद-कीटनाशकों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को भी कृषि क्षेत्र की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।
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दक्षिण भारत में बागवानी की बड़ी संभावनाएं
दक्षिणी राज्यों में नारियल, मसाले, कॉफी, काजू, कोको और अन्य बागवानी फसलों का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और बाजार तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
नारियल क्षेत्र को लेकर भी सम्मेलन में विशेष चर्चा हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से नारियल और नारियल उत्पादों का निर्यात करीब 7,038 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष के लगभग 4,349 करोड़ रुपये से 62 प्रतिशत अधिक है।
कृषि में डिजिटल तकनीक और किसान रजिस्ट्री
सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में डिजिटल कृषि और Farmer Registry भी शामिल रहे। डिजिटल तकनीकों के जरिए किसानों से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित करने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने और कृषि सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा राज्यों में अपनाई जा रही मौसम आधारित कृषि सलाह, प्रिसिजन फार्मिंग और अन्य तकनीकी पहलों को साझा करने का भी उद्देश्य रखा गया है।
प्राकृतिक खती और फसल विविधीकरण पर चर्चा
बदलते मौसम और कृषि लागत जैसी चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली और फसल विविधीकरण को भी महत्वपूर्ण विषय माना गया। सम्मेलन में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुसार खेती के मॉडल विकसित करने पर जोर दिया गया।
दक्षिणी राज्यों में अलग-अलग फसलों और बागवानी उत्पादों की संभावनाओं को देखते हुए किसानों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने पर जोर
क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का एक उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में किए जा रहे सफल प्रयोगों को साझा करना भी है। PIB के अनुसार, तेलंगाना की Rythunestham पहल, आंध्र प्रदेश में मौसम संबंधी कृषि उपाय, कर्नाटक में दाल उत्पादन, केरल की खरीद एवं बाजार पहल और तमिलनाडु की प्रिसिजन फार्मिंग जैसी पहलों को साझा किया गया।
ऐसे उदाहरणों के माध्यम से राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयोगी मॉडलों को अपनाने का अवसर मिल सकता है।
कृषि सुधार और बाजार से जुड़ाव
कृषि विकास के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात सुविधाओं से जोड़ना भी जरूरी है। इसी दिशा में सम्मेलन में कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।
सरकार की ओर से बताया गया है कि क्षेत्रीय सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कृषि रणनीति तैयार करने का मंच है।

