आम के प्रमुख कीट और रोगों की पहचान, लक्षण और बचाव के आसान उपाय जानें। सही समय पर प्रबंधन अपनाकर उपज और फलों की गुणवत्ता बेहतर करें।
आम को भारत में फलों का राजा कहा जाता है और यह देश की प्रमुख व्यावसायिक फल फसलों में शामिल है। आम के पेड़ों पर कई तरह के कीट और रोग हमला कर सकते हैं, जिससे फूल, नई टहनियां, पत्तियां और फलों को नुकसान पहुंचता है। समय रहते इनकी पहचान और नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन के साथ-साथ फलों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य पर भी असर पड़ सकता है।
आम के बाग में एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके तहत बाग की साफ-सफाई, उचित छंटाई, जैविक नियंत्रण, निगरानी और जरूरत पड़ने पर स्वीकृत रसायनों का इस्तेमाल शामिल है।
आम में लगने वाले प्रमुख कीट और उनका प्रबंधन
1. आम का हॉपर
आम हॉपर छोटे आकार के कीट होते हैं, जो विशेष रूप से फूलों के गुच्छों और नई टहनियों पर दिखाई देते हैं। इनका रंग हरा, भूरा या धूसर हो सकता है।
पहचान के प्रमुख लक्षण:
- फूलों और कोमल टहनियों पर छोटे कीट दिखाई देना।
- पत्तियों व पुष्पगुच्छों पर चिपचिपा पदार्थ जमा होना।
- बाद में काली कालिख जैसी फफूंद का विकास।
- फूलों का झड़ना और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होना।
बचाव और प्रबंधन: बाग में बहुत अधिक घनी शाखाओं की छंटाई करके हवा और प्रकाश का आवागमन बेहतर करें। जरूरत से अधिक नाइट्रोजन देने से बचें। मकड़ियों और लेडीबर्ड बीटल जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को संरक्षण देना भी उपयोगी है।
रासायनिक नियंत्रण के लिए स्थानीय रूप से स्वीकृत उत्पादों और लेबल निर्देशों के अनुसार इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथॉक्साम जैसे कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. आम का मिलीबग
मिलीबग टहनियों, पत्तियों और फूलों के गुच्छों पर सफेद रूई जैसे दिखाई देते हैं। इनके प्रकोप वाले पेड़ों पर अक्सर चींटियों की गतिविधि भी बढ़ जाती है।
नुकसान:
- पौधे का रस चूसने से वृद्धि कमजोर होती है।
- पुष्पगुच्छ प्रभावित होकर सूख सकते हैं।
- फल बनने की संख्या घट सकती है।
प्रबंधन: गर्मी के मौसम में मिट्टी की गहरी जुताई करने से जमीन में मौजूद कीट के अंडों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। पेड़ के तने पर उचित ग्रीस बैंड लगाकर मिलीबग के ऊपर चढ़ने को रोका जा सकता है।
जैविक नियंत्रण के लिए Cryptolaemus montrouzieri जैसे शिकारी कीटों का उपयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण के लिए वर्तमान पंजीकृत और अनुशंसित कीटनाशक का ही प्रयोग करें।
3. आम की फल मक्खी
फल मक्खी पके या पकने वाले फलों को खास तौर पर नुकसान पहुंचाती है। मादा मक्खी फलों में अंडे देती है, जिससे अंदर मैगट विकसित होते हैं।
लक्षण:
- फलों की सतह पर छोटे भूरे या काले निशान।
- फल के अंदर कीट की सूंडी या मैगट।
- फल सड़ने लगते हैं और समय से पहले गिर सकते हैं।
- कटाई के बाद भी नुकसान जारी रह सकता है।
प्रबंधन: बाग में गिरे हुए और संक्रमित फलों को नियमित रूप से इकट्ठा करके नष्ट करें। संक्रमित फलों को जमीन में उचित गहराई पर दबाना भी उपयोगी उपाय है।
फल मक्खी की निगरानी के लिए अनुशंसित आकर्षक/ट्रैप का प्रयोग किया जा सकता है। कीटनाशक का प्रयोग करते समय कटाई से पहले निर्धारित प्रतीक्षा अवधि का अनिवार्य रूप से पालन करें।
4. आम का तना छेदक
तना छेदक कीट पेड़ के तने और मोटी शाखाओं में सुरंग बनाकर अंदर से नुकसान करता है।
पहचान:
- तने या शाखाओं पर छेद दिखाई देना।
- छेद के आसपास बुरादा या फ्रास निकलना।
- गोंद जैसा पदार्थ बाहर आना।
- प्रभावित शाखाओं का धीरे-धीरे सूखना।
गंभीर संक्रमण में पेड़ की संरचना कमजोर हो सकती है।
प्रबंधन: बाग में सूखी और संक्रमित शाखाओं को हटाएं। तने की नियमित निगरानी करें। दिखाई देने वाले छेदों में मौजूद ग्रब को यांत्रिक तरीके से निकालने की कोशिश की जा सकती है। किसी भी रासायनिक उपचार के लिए वर्तमान कृषि अनुशंसा का पालन करें।
5. लीफ वेबर
लीफ वेबर कीट की सूंडियां पत्तियों को आपस में जोड़कर जाल जैसा बना देती हैं और पत्तियों को खाती हैं।
नुकसान:
- पत्तियां जालीदार या कंकालीय हो जाती हैं।
- प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है।
- पेड़ की सामान्य बढ़वार कमजोर हो सकती है।
प्रबंधन: प्रभावित पत्तियों और जाल को हटाकर नष्ट करें। जैविक नियंत्रण के लिए Bacillus thuringiensis (Bt) आधारित उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण में किसी स्वीकृत कीटनाशक का इस्तेमाल फसल अवस्था और लेबल निर्देश के अनुसार करें।
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आम के प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन
1. पाउडरी मिल्ड्यू
यह रोग आम में विशेष रूप से फूल आने के समय नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्य लक्षण:
- पत्तियों, फूलों और छोटे फलों पर सफेद चूर्ण जैसी परत।
- पुष्पगुच्छों का प्रभावित होना।
- फूलों का गिरना और फल बनने में कमी।
ठंडी रातों और अधिक आर्द्रता वाली परिस्थितियों में इसका प्रकोप बढ़ सकता है।
प्रबंधन: बाग में उचित छंटाई करके हवा और सूर्य के प्रकाश का प्रवेश बढ़ाएं। रोग की स्थिति में स्थानीय रूप से स्वीकृत सल्फर या उपयुक्त फफूंदनाशी का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।
2. एन्थ्रेक्नोज
आम में एन्थ्रेक्नोज पत्तियों, फूलों और फलों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण रोग है।
लक्षण:
- पत्तियों और फूलों पर काले या गहरे रंग के धब्बे।
- फलों पर काले धब्बे बनना।
- भंडारण और परिवहन के दौरान फलों के सड़ने का खतरा बढ़ना।
बारिश और लगातार अधिक नमी वाली परिस्थितियां रोग के लिए अनुकूल होती हैं।
प्रबंधन: संक्रमित टहनियों और पौधों के हिस्सों की छंटाई करें तथा बाग में साफ-सफाई बनाए रखें। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से पंजीकृत फफूंदनाशी का प्रयोग करें।
3. बैक्टीरियल कैंकर
बैक्टीरियल कैंकर में पत्तियों, शाखाओं और फलों पर अलग-अलग प्रकार के घाव दिखाई दे सकते हैं।
पहचान के लक्षण:
- पत्तियों पर पीले घेरे वाले धब्बे।
- शाखाओं पर दरारें या घाव।
- प्रभावित हिस्सों से गोंद का रिसाव।
- फलों की सतह पर भी संक्रमण के निशान दिखाई दे सकते हैं।
प्रबंधन: स्वस्थ और रोगमुक्त पौध सामग्री का उपयोग करें। संक्रमित हिस्सों को बाग से हटाकर नष्ट करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए वर्तमान स्वीकृत कॉपर आधारित उत्पाद या अन्य अनुशंसित उपचार का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से करें।
4. रेड रस्ट
रेड रस्ट को शैवाल जनित पत्ती धब्बा भी कहा जाता है। इसमें पत्तियों पर नारंगी से लाल रंग के गोलाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं। अधिक नमी और छायादार परिस्थितियों में इसका प्रकोप बढ़ सकता है।
प्रबंधन: पेड़ों की उचित छंटाई करके बाग में सूर्य के प्रकाश और हवा का आवागमन बढ़ाएं। आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कॉपर आधारित फफूंदनाशी या अन्य स्वीकृत उपचार का प्रयोग करें।
5. आम में मालफॉर्मेशन
आम का मालफॉर्मेशन फूलों और नई बढ़वार को प्रभावित कर सकता है। इसमें पुष्पगुच्छ सामान्य आकार के बजाय असामान्य और गुच्छेदार दिखाई दे सकते हैं।
प्रमुख लक्षण:
- असामान्य फूलों के गुच्छे।
- विकृत नई टहनियां।
- पुष्पगुच्छों से फल बनने में कमी।
- पेड़ की सामान्य बढ़वार प्रभावित होना।
प्रबंधन: प्रभावित फूलों और टहनियों की समय पर छंटाई करके उन्हें बाग से बाहर नष्ट करें। अत्यधिक नाइट्रोजन के इस्तेमाल से बचें। किसी भी वृद्धि नियामक या फफूंदनाशी का प्रयोग स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या विभाग की वर्तमान सिफारिश के अनुसार करें।
आम के कीट और रोग रोकने के लिए IPM अपनाएं
आम के बाग में केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत प्रबंधन पद्धति अपनाना अधिक उपयोगी हो सकता है।
किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- स्वस्थ और प्रमाणित पौध सामग्री का चयन करें।
- बाग में गिरे और संक्रमित फलों को नियमित रूप से हटाएं।
- सूखी और रोगग्रस्त शाखाओं की समय पर छंटाई करें।
- पेड़ों के बीच पर्याप्त हवा और प्रकाश का प्रबंध रखें।
- नाइट्रोजन सहित उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करें।
- कीटों की संख्या और रोग के लक्षणों की नियमित निगरानी करें।
- प्राकृतिक शत्रुओं और जैविक नियंत्रण विधियों को संरक्षण दें।
- कीट या रोग आर्थिक नुकसान की सीमा तक पहुंचने पर ही रासायनिक नियंत्रण पर विचार करें।
- किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशी की मात्रा, प्रतीक्षा अवधि और कटाई संबंधी निर्देश लेबल तथा स्थानीय कृषि विभाग की वर्तमान सिफारिश के अनुसार ही मानें।

