जनकपुरी POCSO केस में पीड़िता की मां को धमकी के आरोप लगे। सौरभ भारद्वाज ने कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवार की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
जनकपुरी स्कूल से जुड़े POCSO मामले में एक नया विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां को कथित तौर पर धमकी दी गई। इस घटना को लेकर उन्होंने कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवार की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट परिसर में धमकी का आरोप
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, पीड़िता की मां ने दावा किया है कि अदालत परिसर में आरोपी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने उन्हें आपत्तिजनक इशारा किया और धमकी दी। यह घटना कथित रूप से उस समय हुई जब मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही थी और वहां कई लोग मौजूद थे। पीड़ित परिवार का कहना है कि पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो सकती है।
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जमानत आदेश को चुनौती
यह मामला जनकपुरी स्कूल POCSO केस से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपी को गिरफ्तारी के कुछ दिनों के भीतर मिली जमानत को चुनौती दी गई है। पीड़ित पक्ष ने अदालत में याचिका दाखिल कर जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि अदालत परिसर के भीतर ही पीड़ित परिवार सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि इस आरोप की निष्पक्ष जांच हो और यदि धमकी की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
Shocking !!
Today, at Delhi High Court, the Mother of 3 yo rape victim has alleged that she was threatened by son of accused. She was allegedly shown middle finger by the son of 57 yo accused and then threatened that she will face the same like her 3 yo daughter.
Imagine, this…
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) June 24, 2026
सुनवाई में देरी पर सवाल
सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की सुनवाई कई बार स्थगित हो चुकी है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार टलने से परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है और न्याय प्रक्रिया की गति पर सवाल उठते हैं।
सुरक्षा की मांग
उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की। उनका कहना है कि किसी भी तरह की धमकी या दबाव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष और सुरक्षित बनी रहे।
यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है।

