पांडव परिवार से मुलाकात के बाद आम आदमी पार्टी विधायक संजीव झा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और ₹1 करोड़ आर्थिक सहायता व नौकरी की मांग को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए।
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है, जहां आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने पांडव परिवार से मुलाकात के बाद सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यशैली और संवेदनशील मामलों के निपटारे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पांडव परिवार से मुलाकात के बाद बयान
संजीव झा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वह पांडव परिवार से मिलने पहुंचे थे, जहां परिवार ने अपनी समस्याओं और कठिनाइयों को विस्तार से साझा किया। परिवार का कहना है कि उन्हें पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से मिलने के लिए बुलाया गया था, लेकिन कुछ पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिस के माध्यम से परिवार को सरकारी कार्यालय बुलाया गया, जिससे मामले को लेकर विवाद और बढ़ गया।
आर्थिक सहायता और नौकरी की मांग
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता और एक सरकारी नौकरी की मांग को लेकर सामने आया है। संजीव झा ने कहा कि परिवार ने अपनी स्थिति को देखते हुए यह मांग रखी थी, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार के साथ ऐसी स्थिति होती है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह मानवीय आधार पर सहायता प्रदान करे।
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सरकार पर तीखे आरोप
संजीव झा ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों में जिस तरह से निर्णय लिए जाते हैं, वह संतोषजनक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पीड़ित परिवारों को उचित न्याय और समय पर सहायता नहीं मिल पाती।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल पांडव परिवार के साथ खड़ा रहना और उनकी आवाज को आगे तक पहुंचाना है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
विधायक संजीव झा ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए और यदि परिवार को सहायता मिलनी है तो उसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि वह इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर भी इसे लेकर जाएंगे।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी चर्चा
इस बयान के बाद दिल्ली की राजनीति में फिर से चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मामले को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अब प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या पांडव परिवार को किसी प्रकार की राहत मिलती है या नहीं।

