हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार, नई तकनीक और नेतृत्व क्षमता का विकास ही देश के उज्ज्वल भविष्य की असली नींव है।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल किताबी शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को संस्कार, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक तकनीक की समझ देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि अध्यापक ही बच्चों के भविष्य के वास्तविक शिल्पकार होते हैं और स्कूलों को फिर से गुरुकुल जैसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जहां शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और जीवन के संस्कारों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
अंबाला छावनी में आयोजित एक संस्थान के “स्कूल उत्कृष्टता सम्मान समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अनिल विज ने शिक्षण संस्थानों के संचालकों, अध्यापकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य स्कूलों में तैयार होता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को केवल अंकों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पुराने समय में गुरुकुलों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन जीने की कला, अनुशासन और संस्कार भी सिखाए जाते थे। आज के आधुनिक स्कूलों को भी उसी सोच को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल बच्चों को अच्छे संस्कार देंगे तो आने वाली पीढ़ी निश्चित रूप से समाज और देश को नई दिशा देगी।
अनिल विज ने अध्यापकों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जैसे कोई शिल्पकार मिट्टी को आकार देकर सुंदर प्रतिमा तैयार करता है, उसी प्रकार अध्यापक बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। शिक्षक ही बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं और उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आधुनिक तकनीक और बदलते समय की जरूरतों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीक हर क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में बच्चों को नई तकनीकों से दूर रखने के बजाय उन्हें इनके साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर शुरू हो चुका है और भविष्य में इसका प्रभाव हर क्षेत्र में दिखाई देगा। इसलिए स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से लैस करें। उन्होंने कहा कि यदि नई तकनीक समाज के लिए अवसर लेकर आई है तो हमें उसके सकारात्मक उपयोग को समझना होगा और बच्चों को उसमें दक्ष बनाना होगा।
अनिल विज ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में अब पुराने रटने वाले तरीके की जगह संवाद, प्रयोग और व्यवहारिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रश्न पूछने, सोचने और समझने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। यही प्रक्रिया उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि खेल-खेल में सीखने वाली तकनीकों और उपकरणों को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए ताकि बच्चे आनंद के साथ नई चीजें सीख सकें। उनका मानना है कि बेहतर वातावरण और सकारात्मक माहौल बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित करता है और उनमें सीखने की इच्छा बढ़ाता है।
कार्यक्रम में अनिल विज ने राजनीति और नेतृत्व निर्माण पर भी खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर राजनीति की आलोचना की जाती है, लेकिन केवल आलोचना करने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। यदि देश को बेहतर नेतृत्व चाहिए तो स्कूलों को भविष्य के अच्छे नेता तैयार करने की दिशा में भी काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अभिभावक अपने बच्चों को अधिकारी, चिकित्सक और अभियंता बनाना चाहते हैं, उसी प्रकार उन्हें अच्छे जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार नागरिक बनाने की सोच भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता अच्छे प्रतिनिधियों पर निर्भर करती है और ऐसे प्रतिनिधियों को तैयार करने की जिम्मेदारी शिक्षा संस्थानों की भी है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्कूलों में इस विषय पर भी चर्चा होनी चाहिए कि आदर्श नेता कैसा होना चाहिए और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियां क्या हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही जिम्मेदारी, सेवा भावना और नेतृत्व के संस्कार दिए जाएंगे तो भविष्य में देश को बेहतर दिशा मिल सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को सम्मानित भी किया गया। बताया गया कि सम्मान के लिए लगभग दो सौ प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से करीब चालीस स्कूलों का चयन किया गया।
अनिल विज ने सम्मानित स्कूलों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थान समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता को बढ़ावा देंगे।
समारोह में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में ऊर्जा मंत्री ने सभी शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे बच्चों को केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संस्कारित और जागरूक नागरिक बनाने के उद्देश्य से शिक्षा प्रदान करें।

