हरियाणा सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और हेल्पलाइन व वृद्धाश्रम व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
हरियाणा सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनने के निर्देश दिए हैं। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि समाज की नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी का प्रतीक है।
चंडीगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान मुख्य सचिव ने उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों का निपटारा पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ करें। कार्यशाला का आयोजन सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा अंत्योदय विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेशभर से प्रशासनिक अधिकारी, विधि विशेषज्ञ और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि पहले संयुक्त परिवार व्यवस्था में बुजुर्गों की देखभाल परिवार की स्वाभाविक जिम्मेदारी मानी जाती थी। परिवार के सदस्य न केवल उनका आर्थिक सहयोग करते थे, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करते थे। लेकिन बदलते सामाजिक ढांचे और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण आज अनेक बुजुर्ग अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत संस्थागत सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे बुजुर्गों से जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न समझें, बल्कि इसे सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में देखें।
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मुख्य सचिव ने कहा कि यह कानून वरिष्ठ नागरिकों को केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आश्रय और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना भी इसका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं अधिकारियों को इस कानून की गहराई समझने और मामलों का समयबद्ध समाधान करने में मदद करती हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी जिलों में वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही वृद्धाश्रमों, वरिष्ठ नागरिक क्लबों, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन आश्रय सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में संचालित सभी सरकारी और गैर-सरकारी वृद्धाश्रमों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि वहां रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल कानून व्यवस्था और सरकारी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मानवीय और संवेदनशील प्रशासन ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ और संबंधित नियमों के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी ट्रिब्यूनल व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है, ताकि पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सके।
समीक्षा बैठक में वर्ष 2025 की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान 177 वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण भत्ता स्वीकृत किया गया है।
कार्यशाला में ट्रिब्यूनल व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जो वरिष्ठ नागरिक स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, वे नाममात्र शुल्क देकर आवेदन कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल को प्रति माह 10 हजार रुपये तक भरण-पोषण भत्ता निर्धारित करने का अधिकार है। इसके अलावा कार्यवाही के दौरान अंतरिम भत्ता भी दिया जा सकता है।
यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ वसूली और कारावास जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही जिनकी मासिक आय 1500 रुपये से कम है और जो पूरी तरह असहाय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में औपचारिक शिकायत का इंतजार करने के बजाय स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे न केवल बुजुर्गों के अधिकार मजबूत होंगे, बल्कि समाज में उनके प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की भावना भी बढ़ेगी।

