एमडीयू में शोधार्थियों से संवाद, कुलपति प्रो. मिलाप पूनिया ने समाजोपयोगी शोध पर दिया जोर
Maharshi Dayanand University के कुलपति Milap Poonia ने शोधार्थियों से आह्वान किया है कि वे ऐसा शोध कार्य करें जो समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी साबित हो। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
चंडीगढ़ में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शोधार्थियों से बातचीत करते हुए गुणवत्ता-आधारित और उद्देश्यपूर्ण रिसर्च की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य ऐसे शोध को बढ़ावा देना है, जो समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा हो और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सके।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिसर्च की अपील
प्रो. मिलाप पूनिया ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि देश और समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में शोधार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने शोध विषयों का चयन करते समय सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि शोध केवल पुस्तकालयों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव आम लोगों के जीवन में भी दिखाई देना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में शोधार्थियों को बेहतर संसाधन और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शोध सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा
संवाद कार्यक्रम के दौरान शोधार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और विश्वविद्यालय में रिसर्च सुविधाओं को और बेहतर बनाने से जुड़े कई सुझाव साझा किए।
शोधार्थियों ने संसाधनों की उपलब्धता, शोध प्रयोगशालाओं के विस्तार, डिजिटल सुविधाओं और अकादमिक गुणवत्ता सुधार को लेकर अपने विचार रखे। कुलपति ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की दिशा में काम किया जाएगा।
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विभिन्न विभागों के शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
इस संवाद कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई विभागों के शोधार्थियों ने भाग लिया। इनमें भूगोल, इमसार, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, अंग्रेजी, वाणिज्य, हिंदी और बायोटेक्नोलॉजी विभाग के विद्यार्थी शामिल रहे।
कार्यक्रम में वंदीक ढिल्लों, आशीष तंवर, दीपक लोहचब, सुबोध यादव, देव कुमार, सुधीर घनघस, अजय रेड्डू और सुशील समेत कई शोधार्थियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम शोध संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे शोधार्थियों को न केवल मार्गदर्शन मिलता है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होता है।
एमडीयू प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें शुरू की जाएंगी ताकि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।

