मजदूर दिवस से पहले हरपाल सिंह चीमा ने डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और श्रमिक अधिकारों के संदेश को दोहराया।
मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने B. R. Ambedkar के जीवन, विचारों और उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय और समानता का सबसे बड़ा प्रतीक बताया। इस अवसर पर पंजाब के एडवोकेट जनरल कार्यालय में कार्यरत लॉ ऑफिसर्स द्वारा आयोजित एक विशेष सेमिनार में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और संविधानिक मूल्यों तथा श्रमिक अधिकारों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का प्रमुख शिल्पकार बताते हुए कहा कि उन्होंने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत आज भी एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
अपने संबोधन में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं, बल्कि अधिकारों और समानता के लिए लड़ी गई एक ऐतिहासिक लड़ाई है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचार आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित कर रहे हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखते हैं।
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि देश को वास्तव में मजबूत और भेदभाव मुक्त बनाना है, तो डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे केवल अंबेडकर की जयंती मनाने या उन्हें श्रद्धांजलि देने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके बताए मार्ग—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—को अपने जीवन में उतारें।
कार्यक्रम में उपस्थित लॉ ऑफिसर्स और न्यायिक विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखते हुए संविधान की सर्वोच्चता और मौलिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार डॉ. अंबेडकर ने कानून को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया और इसे कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए इस्तेमाल किया।
मजदूर दिवस से ठीक पहले आयोजित इस सेमिनार का विशेष महत्व भी रहा। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने भारत में श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। इनमें 8 घंटे की कार्य अवधि, मातृत्व लाभ और न्यूनतम मजदूरी जैसी ऐतिहासिक पहलें शामिल हैं, जिन्होंने श्रमिक वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल डॉ. अंबेडकर के योगदान को याद करना था, बल्कि उनके विचारों को आज के संदर्भ में समझना और उन्हें समाज में लागू करने के लिए प्रेरित करना भी था।
कुल मिलाकर, यह सेमिनार सामाजिक न्याय, समानता और श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहां डॉ. अंबेडकर के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

