कुम्हार-कुमावत-प्रजापत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से मुलाकात की, ‘माटी राजस्थान री’ पुस्तक का विमोचन और ई-चाक योजना की घोषणा।
राजस्थान में पारंपरिक कारीगर समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मुख्यमंत्री निवास पर Kumhar-Kumawat-Prajapat community के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और राज्य सरकार द्वारा समाज के हित में किए जा रहे कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को दर्शाने वाली पुस्तक ‘माटी राजस्थान री’ का भी विधिवत विमोचन किया गया, जिसने राज्य की समृद्ध मिट्टी कला और परंपराओं को उजागर किया।
बैठक के दौरान यह रेखांकित किया गया कि कुम्हार, कुमावत और प्रजापत समाज का राजस्थान के सामाजिक और आर्थिक विकास में ऐतिहासिक योगदान रहा है। सदियों से यह समुदाय मिट्टी की कला के माध्यम से न केवल अपनी आजीविका चलाता रहा है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाता आया है। बदलते समय में इस पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ना अब बेहद जरूरी हो गया है, ताकि कारीगरों की आय बढ़ सके और उनकी कला को व्यापक बाजार मिल सके।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बजट में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कुम्हार समुदाय के कारीगरों को इलेक्ट्रिक चाक (ई-चाक) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस पहल से पारंपरिक चाक की तुलना में काम की गति बढ़ेगी, उत्पादन में सुधार होगा और कारीगरों को कम मेहनत में अधिक आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह कदम युवाओं को भी इस पारंपरिक कला से जोड़ने में मदद करेगा, जो आधुनिकता के चलते इससे दूर होते जा रहे हैं।
also read : टूरिज्म स्टेकहोल्डर कॉन्फ्रेंस 2026: दिल्ली को विश्वस्तरीय पर्यटन हब बनाने की दिशा में सरकार का रोडमैप
सरकार का मानना है कि हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाएं केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में इन कलाओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ कारीगरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। इस दिशा में राज्य सरकार लगातार योजनाएं बना रही है और विभिन्न समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास कर रही है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ई-चाक योजना से हजारों कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सरकार भविष्य में भी इस तरह की योजनाओं के माध्यम से पारंपरिक कारीगर समुदायों को समर्थन देती रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि राज्य सरकार सभी वर्गों और समुदायों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चाहे वह आर्थिक सशक्तिकरण हो, शिक्षा हो या सांस्कृतिक संरक्षण—हर क्षेत्र में संतुलित विकास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, कुम्हार-कुमावत-प्रजापत समाज के लिए की गई यह घोषणा न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को नई ऊर्जा देने वाली पहल भी साबित होगी।

