Ek Din रिव्यू में जानिए जुनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म थिएटर में देखने लायक है या ओटीटी पर इंतजार करना बेहतर
Ek Din के साथ जुनैद खान और साई पल्लवी की जोड़ी बड़े पर्दे पर नजर आई है, और फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता भी काफी थी। एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट—एक दिन में सिमटी प्रेम कहानी, जापान की खूबसूरत लोकेशंस और किस्मत बनाम प्लानिंग जैसे भावनात्मक तत्व—सुनने में तो फिल्म एक मजबूत रोमांटिक ड्रामा का वादा करती है। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या यह फिल्म आज के तेज-रफ्तार दर्शकों को बांध पाती है या फिर अपनी धीमी गति के कारण पीछे रह जाती है।
फिल्म की कहानी दिनेश नाम के एक इंट्रोवर्ट और ‘इनविजिबल’ ऑफिस कर्मचारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी कलीग मीरा से एकतरफा प्यार करता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब जापान के सपोरो में एक हादसे के बाद मीरा की याददाश्त एक दिन के लिए चली जाती है। इस एक दिन में दिनेश को मौका मिलता है अपने दिल की बात कहने का—और यहीं से फिल्म का मुख्य भावनात्मक संघर्ष शुरू होता है।
हालांकि, इस दिलचस्प प्लॉट के बावजूद फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार और पुरानी कहानी कहने की शैली बन जाती है। आज जहां दर्शक तेज गति वाली थ्रिलर, कंटेंट-ड्रिवन ड्रामा या अलग तरह की कहानियों को पसंद कर रहे हैं, वहीं यह फिल्म पुराने जमाने के रोमांटिक फॉर्मूले में अटकी हुई नजर आती है। बॉस-एम्प्लॉई रोमांस और झूठ पर टिके रिश्तों जैसे ट्रोप्स कहानी को और भी प्रेडिक्टेबल बना देते हैं।
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डायरेक्शन और राइटिंग की बात करें तो फिल्म एक ‘सॉफ्ट’ और शांत टोन में आगे बढ़ती है, लेकिन कई जगह यही शांति बोरियत में बदल जाती है। हालांकि सिनेमैटोग्राफी फिल्म का मजबूत पक्ष है—जापान की बर्फीली वादियां और स्नो फेस्टिवल के दृश्य स्क्रीन पर बेहद आकर्षक लगते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी भावनाओं को सहारा देने की कोशिश करता है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उसे ज्यादा मदद नहीं कर पाती।

एक्टिंग की बात करें तो जुनैद खान अपने किरदार में पूरी तरह डूबे नजर आते हैं, लेकिन कई बार उनकी परफॉर्मेंस जरूरत से ज्यादा ‘मेथड’ लगती है, जिससे कनेक्ट टूटता है। वहीं साई पल्लवी अपनी नैचुरल एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस से फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश करती हैं और कई दृश्यों में वही फिल्म की असली ताकत बनकर उभरती हैं।
फिल्म का एक और बड़ा मुद्दा यह है कि यह एक रीमेक है, और आज के डिजिटल दौर में जब दर्शक ओरिजिनल कंटेंट आसानी से देख सकते हैं, ऐसे में रीमेक को नया और फ्रेश बनाना बेहद जरूरी हो जाता है—जो यहां पूरी तरह सफल नहीं हो पाता।
कुल मिलाकर, ‘Ek Din’ एक खराब फिल्म नहीं है, लेकिन यह उतनी प्रभावशाली भी नहीं बन पाती कि थिएटर तक दर्शकों को मजबूती से खींच सके। अगर आप साई पल्लवी के फैन हैं या सॉफ्ट रोमांटिक ड्रामा पसंद करते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है, लेकिन आम दर्शकों के लिए यह फिल्म ओटीटी पर देखना ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

