AAP नेता बलतेज पन्नू ने अकाली दल पर गैंगस्टरों को संरक्षण देने और राजनीति में शामिल करने के गंभीर आरोप लगाए
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जहाँ आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल रही है। इस बार विवाद की वजह बने हैं AAP के प्रदेश मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू, जिन्होंने अकाली दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जो पार्टी सार्वजनिक रूप से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, वही पर्दे के पीछे अपराधियों और गैंगस्टरों को राजनीतिक संरक्षण देती रही है।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान पन्नू ने आरोप लगाया कि अकाली दल का “दोहरा चेहरा” अब पूरी तरह सामने आ चुका है। उन्होंने कहा कि पार्टी एक ओर शांति और कानून-व्यवस्था की बात करती है, जबकि दूसरी ओर कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर के परिवार के सदस्य को चुनाव क्षेत्र का इंचार्ज बनाकर उसे राजनीतिक शक्ति प्रदान करती है। उनके अनुसार, यह न केवल राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी में जमीनी स्तर पर ईमानदार कार्यकर्ताओं की कमी हो गई है।
पन्नू ने आगे दावा किया कि यह कोई एकल मामला नहीं है, बल्कि अकाली दल पर पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि वह गैंगस्टरों या उनके करीबियों को मुख्यधारा की राजनीति में शामिल करने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को अपनी संगठनात्मक मजबूती के लिए अपराध से जुड़े लोगों के परिवारों का सहारा लेना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
also read : संगरूर के सतौज में 14.63 करोड़ का आधुनिक खेल स्टेडियम, युवाओं को नशे से दूर कर खेलों की ओर ले जाएगी नई पहल
हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए पन्नू ने कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के परिवार से जुड़े एक मामले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जबरन वसूली से जुड़े आरोपों में दर्ज एक केस में अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था, लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। पन्नू के अनुसार, इस मामले में परिवार की ओर से पेश होने वाले वकीलों के राजनीतिक संबंधों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और इससे विपक्षी दल की भूमिका पर संदेह गहराया है।
AAP नेता ने यह भी कहा कि एक तरफ अकाली दल राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर रहता है, जबकि दूसरी ओर उसी के कुछ लोग कथित तौर पर कानून तोड़ने वालों के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को राजनीतिक मंच देना और उन्हें संगठन में जिम्मेदार पद सौंपना इस बात का संकेत है कि पार्टी की प्राथमिकताएं स्पष्ट नहीं हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर अकाली दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप आगामी चुनावी माहौल में सियासी तापमान को और बढ़ा सकते हैं। पंजाब में पहले ही कानून-व्यवस्था और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर बहस जारी है, और इस तरह के बयान उस बहस को और तेज कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आरोप-प्रत्यारोप की रणनीति को दर्शाता है, जहाँ राजनीतिक दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और इसका राज्य की राजनीतिक दिशा पर क्या प्रभाव पड़ता है।

