हरियाणा कला परिषद ने लोक कलाओं को बढ़ावा देने और बच्चों के लिए समर क्रिएटिव कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हरियाणा कला परिषद् ने एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। परिषद के निदेशक विवेक कालिया ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि लोक नृत्य, लोक गीत और लोक नाटक जैसी पारंपरिक कलाएं हरियाणा की पहचान हैं और इन्हें संरक्षित करना समय की आवश्यकता है।
परिषद द्वारा शुरू किया गया यह अभियान केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। इसके जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कलाकारों को एक समान मंच प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकें और अपनी कला को नई पहचान दिला सकें।
विवेक कालिया ने बताया कि इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। इसी दिशा में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विशेष रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें बच्चों को चित्रकला, रंगमंच, लोक नृत्य और अन्य कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक समझ का विकास होगा।
also read : हरियाणा बनेगा ग्लोबल एक्सपोर्ट हब, तंजानिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भाग लेगा प्रतिनिधिमंडल: राव नरबीर सिंह
उन्होंने यह भी बताया कि परिषद जल्द ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रही है, जहां कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। चयनित कलाकारों को प्रस्तुति से पहले अग्रिम आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे वे अपनी कला को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें। यह पहल कलाकारों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगी और उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास न केवल लोक कलाओं को संरक्षित करने में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें आधुनिक मंचों तक पहुंचाने में भी सहायक होंगे। इससे हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
हरियाणा कला परिषद का यह अभियान राज्य में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा और पारंपरिक कलाओं को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

