उत्तराखंड वन विकास निगम की सिल्वर जुबली पर हिम काष्ठ ऐप लॉन्च, ₹167 करोड़ मुनाफा और कुमाऊं में नए कार्यालय की घोषणा।
उत्तराखंड में विकास और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उस समय देखने को मिला जब Uttarakhand Forest Development Corporation की सिल्वर जुबली समारोह का आयोजन मुख्यमंत्री आवास (Chief Servant’s Residence) में किया गया। इस अवसर पर सरकार ने ‘हिम काष्ठ ऐप’ का शुभारंभ किया और मेधावी छात्रों को सम्मानित कर शिक्षा व नवाचार को भी बढ़ावा दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब नीतियां स्पष्ट हों और नीयत साफ हो, तो परिणाम अपने आप सकारात्मक आते हैं। उन्होंने बताया कि Uttarakhand Forest Development Corporation ने इसी सिद्धांत पर काम करते हुए ₹167 करोड़ का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल राज्य के वन क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह सुशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली का भी प्रमाण है।
इस मौके पर लॉन्च किया गया ‘हिम काष्ठ ऐप’ वन संसाधनों से जुड़े कार्यों को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस ऐप के जरिए लकड़ी और अन्य वन उत्पादों से संबंधित प्रक्रियाएं आसान होंगी, जिससे आम लोगों और व्यापारियों दोनों को सुविधा मिलेगी।
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सरकार ने लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं मंडल में Kumaon Division में वन विकास निगम का नया कार्यालय स्थापित करने की भी घोषणा की। इससे क्षेत्रीय स्तर पर सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी और स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्रों को सम्मानित कर सरकार ने यह संदेश भी दिया कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी होना चाहिए। छात्रों को प्रोत्साहित करना भविष्य के लिए निवेश के समान है, जिससे राज्य को नई प्रतिभाएं मिलती हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि सरकार विकास के साथ-साथ पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन क्षेत्र में तकनीक के उपयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और नए कार्यालयों के माध्यम से प्रशासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।
इस सिल्वर जुबली समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड में वन संसाधनों का प्रबंधन अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक और बेहतर नीतियों के साथ किया जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे कदम राज्य के आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

