मोहिनी एकादशी 2026 कब है, पूजा विधि, तिथि और महत्व जानें—भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा से मिलता है सुख-समृद्धि और मोक्ष।
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है और इसी क्रम में मोहिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 27 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है और इसे भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।
📅 तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 26 अप्रैल 2026 को शाम 06:08 बजे प्रारंभ होकर 27 अप्रैल 2026 को शाम 06:17 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा।
🙏 व्रत और पूजा विधि
मोहिनी एकादशी के दिन श्रद्धालु प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, पीले फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
भक्त “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हैं और दिनभर व्रत रखकर भगवान का ध्यान करते हैं। रात्रि में भजन-कीर्तन और दीपदान का विशेष महत्व होता है। अगले दिन विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाता है और दान-पुण्य करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
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✨ धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति को मोह-माया से मुक्त कर आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
📖 पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत को लेकर विवाद हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों को मोहित किया और देवताओं को अमृत पान कराया। इसी घटना की स्मृति में इस एकादशी को ‘मोहिनी एकादशी’ कहा जाता है।
📜 शास्त्रों में महत्व
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में इस व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जाने-अनजाने पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🌼 निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा से पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का अनुभव होता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, जो उन्हें धर्म और आस्था के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

