नोएडा और गाजियाबाद में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में 21% तक बढ़ोतरी, जानें नई सैलरी स्ट्रक्चर और सरकार का बड़ा फैसला।
दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर Noida में हाल ही में हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के बाद Uttar Pradesh सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मजदूरों की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी में लगभग 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला 13 अप्रैल को हुए प्रदर्शन के बाद लिया गया, जब श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने स्थिति की समीक्षा कर यह निर्णय लिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित वेतन दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी, जिससे लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
जिला प्रशासन के अनुसार, Gautam Buddha Nagar और Ghaziabad में अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है। वहीं अर्ध-कुशल श्रमिकों की सैलरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये हो गई है और कुशल श्रमिकों को अब 13,940 रुपये की जगह 16,868 रुपये मिलेंगे। इस तरह कुल मिलाकर इन क्षेत्रों में मजदूरी में करीब 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जो हाल के समय में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
सिर्फ नोएडा और गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। नगर निगम वाले जिलों में लगभग 15 प्रतिशत और अन्य जिलों में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लागू की गई है। नए प्रावधानों के तहत नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों का वेतन 13,006 रुपये, अर्ध-कुशल का 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों का 16,025 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं अन्य जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये, अर्ध-कुशल को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये मासिक वेतन मिलेगा।
also read : Nvidia ने खारिज की PC कंपनी खरीदने की खबरें, अफवाहों से Dell और HP के शेयरों में आई तेजी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र स्तर पर नए श्रम संहिता के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में एक समान बेसिक वेतन लागू करना है। राज्य सरकार ने कहा है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले नियोक्ता संगठनों, श्रमिक संघों और अन्य हितधारकों से सलाह-मशविरा किया जा रहा है, ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाई जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे समय पर वेतन भुगतान, ओवरटाइम का उचित मुआवजा, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बीच, प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों का भी खंडन किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। अधिकारियों ने इन दावों को पूरी तरह “झूठा और मनगढ़ंत” बताया है और लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ श्रमिकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम संबंधों को संतुलित करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।

