अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार, शेयर बाजार में गिरावट और वैश्विक सप्लाई पर असर।
वैश्विक बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला, जिससे दाम एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत करीब 102.2 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude का भाव 104.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित बाधा के कारण आई है।
इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका द्वारा ईरान के साथ बातचीत विफल होने के बाद इस मार्ग को ब्लॉक करने की चेतावनी ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखने में विफल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रोक सकता है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि, 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन बातचीत विफल होने से हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं।
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कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी का असर वैश्विक और घरेलू बाजारों पर भी साफ देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं एशियाई बाजारों में भी Nikkei 225, Hang Seng Index और KOSPI जैसे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
घरेलू कमोडिटी बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स का भाव बढ़कर करीब 9,678 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो लगभग 5.7 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ेगा। इससे न केवल ईंधन महंगा हो सकता है, बल्कि महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यही तय करेगा कि तेल की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी।

