दिल्ली विश्वविद्यालय में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में सिग्नेचर अभियान शुरू, महिला आरक्षण को लेकर छात्राओं और महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और अहम पहल के रूप में राजधानी में एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में एक बड़े सिग्नेचर अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं और महिला कर्मियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान भागीदारी दिलाने के लिए जागरूकता बढ़ाना और समर्थन जुटाना है। परिसर में बड़ी संख्या में छात्राओं ने इस पहल में हिस्सा लिया और अपने हस्ताक्षर के माध्यम से महिला आरक्षण के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने कहा कि यह केवल एक हस्ताक्षर अभियान नहीं, बल्कि उनके सपनों, संघर्षों और आत्मविश्वास का प्रतीक है। हर एक हस्ताक्षर के पीछे देश की महिलाओं की वह आकांक्षा झलकती है, जो उन्हें समाज और राजनीति में बराबरी का स्थान दिलाने की दिशा में प्रेरित करती है।
इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे महिला सशक्तिकरण अभियानों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान न केवल युवाओं को जागरूक करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा भी तय करते हैं। विश्वविद्यालयों जैसे शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार की पहल से आने वाली पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के महत्व को समझने का अवसर मिलता है।
बताया जा रहा है कि संसद में आगामी 16 अप्रैल को इस दिशा में होने वाली गतिविधियां देशभर की महिलाओं के लिए नई उम्मीद और विश्वास लेकर आएंगी। यह कदम करोड़ों महिलाओं के सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की महिलाएं केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। देश में बढ़ती जागरूकता और समर्थन इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका और भी अधिक सशक्त और निर्णायक होने वाली है।

