हरियाणा में फसल खरीद प्रणाली को हाईटेक बनाया गया, बायोमेट्रिक, जियो-फेंसिंग और तीन-स्तरीय सत्यापन से पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ी।
हरियाणा सरकार ने फसल खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य में अब तीन-स्तरीय सत्यापन, बायोमेट्रिक पहचान और जियो-फेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खरीद प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया गया है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह किसानों को गुमराह करने के लिए बेवजह दुष्प्रचार कर रहा है, जबकि सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक मंडी में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों और उपायुक्तों को जिलास्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री और विधायक भी लगातार मंडियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने आढ़तियों और किसानों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित की जा रही है।
सरकार द्वारा लागू की गई नई तकनीकी व्यवस्था के तहत तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली अनिवार्य की गई है, जिससे मंडियों में लाई गई फसल का पंजीकृत फसल से सटीक मिलान किया जा सके। इसके साथ ही किसानों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन लागू किया गया है। 8 अप्रैल 2026 तक मंडियों में पहुंची गेहूं की लगभग 75 प्रतिशत फसल का सफलतापूर्वक बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा चुका है। किसानों की सुविधा के लिए तीन नामांकित व्यक्तियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गई है।
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इसके अलावा, राज्य की सभी मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया गया है, जिससे अनधिकृत गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। अब तक 416 गेहूं मंडियों, 112 सरसों मंडियों और 179 अतिरिक्त स्थलों सहित कुल सैकड़ों स्थानों पर जियो-फेंसिंग पूरी की जा चुकी है। साथ ही 1,344 भंडारण केंद्रों को भी इस प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण और निगरानी को सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडियों में ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए गेट पास प्रणाली को भी सुदृढ़ किया गया है। अब एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और लोड की फोटो दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि एग्जिट गेट पास के लिए ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव की संयुक्त स्वीकृति आवश्यक है। 8 अप्रैल 2026 तक 1,74,635 एग्जिट गेट पास बिना किसी समस्या के जारी किए जा चुके हैं, जो इस नई व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन तकनीक आधारित सुधारों से न केवल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इस दिशा में और अधिक नवाचार और सुधार किए जाते रहेंगे।

