अयोध्या राम मंदिर में नव संवत्सर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना, संतों की उपस्थिति में भव्य आयोजन।
नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) के पावन अवसर पर श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या धाम में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों से ‘श्रीराम यंत्र’ की विधिवत प्रतिष्ठापना की गई, जिसे सनातन चेतना के दिव्य स्पंदन के रूप में देखा जा रहा है।
इस भव्य आयोजन में देश की अनेक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सामाजिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, आध्यात्मिक गुरू माता अमृतानंदमयी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी सहित अनेक संत-महात्माओं और गणमान्य व्यक्तियों ने इस पावन अवसर को और अधिक भव्य बना दिया।
सनातन आस्था का दिव्य क्षण
‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना को न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह आयोजन सनातन परंपरा के मूल्यों, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बना।
‘रामराज्य’ की अनुभूति का संदेश
इस अवसर को ‘रामराज्य’ की अनुभूति से जोड़ते हुए संतों और वक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा को सुदृढ़ करने का प्रतीक है।
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बलिदानी रामभक्तों को नमन
कार्यक्रम के दौरान श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले रामभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही इस महायज्ञ से जुड़े संतों और कर्मयोगियों का अभिनंदन किया गया।
भक्ति और राष्ट्रीय चेतना का संगम
अयोध्या धाम में आयोजित यह कार्यक्रम भक्ति, आस्था और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा। धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और संतों के सान्निध्य ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
निष्कर्ष
‘श्रीराम यंत्र’ की प्रतिष्ठापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना के सशक्त प्रसार का प्रतीक बन गई है। यह ऐतिहासिक क्षण आने वाले समय में श्रद्धा, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

