आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी समाधान बताया।
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए इसे मानव कल्याण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
आचार्य देवव्रत ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनाने की जरूरत है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि इससे प्रदेश में सकारात्मक बदलाव आएगा।
गुजरात का उदाहरण
उन्होंने बताया कि गुजरात में करीब 8 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, जहां सरकार और विपक्ष दोनों मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं। इससे किसानों की आय और स्वास्थ्य दोनों में सुधार देखा गया है।
रासायनिक खेती पर चिंता
अपने अनुभव साझा करते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि रासायनिक खेती के कारण:
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मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है
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जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं
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कैंसर, हृदय रोग और किडनी जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में शुद्ध भोजन और पानी की भारी कमी हो सकती है।
प्राकृतिक खेती क्यों जरूरी
आचार्य देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती:
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कम लागत वाली होती है
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देशी गाय आधारित होती है
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पर्यावरण के अनुकूल होती है
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मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है
इस पद्धति में गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसे साधारण तत्वों से सूक्ष्म जीवाणुओं को विकसित कर खेती की जाती है।
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जैविक और प्राकृतिक खेती में अंतर
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक खेती में अधिक मात्रा में गोबर खाद की जरूरत होती है, जबकि प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं पर आधारित होती है और कम लागत में अधिक लाभ देती है।
किसानों की आय में वृद्धि
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती से कई किसान एक एकड़ में लाखों रुपये तक की आय कमा रहे हैं, जिससे यह आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रही है।
प्रशिक्षण पर जोर
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। बिना उचित मार्गदर्शन के इसे अपनाना कठिन हो सकता है, इसलिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।
सदन में चर्चा
विधानसभा में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने उत्पादन, लागत और बाजार से जुड़े सवाल उठाए। आचार्य देवव्रत ने सभी सवालों का वैज्ञानिक आधार पर जवाब देते हुए समाधान प्रस्तुत किया।
निष्कर्ष
आचार्य देवव्रत ने विश्वास जताया कि यदि प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो भारत न केवल स्वास्थ्य संकट से उबर सकता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

