हरियाणा में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 में 2,157 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित की गईं, जिनमें अंबाला जिला 191 पंचायतों के साथ राज्य में सबसे आगे रहा।
हरियाणा ने टीबी उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य की 2,157 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया गया है, जो कुल 6,237 पंचायतों का लगभग 35 प्रतिशत है।
तीन वर्षों में तेजी से बढ़ी टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत “टीबी-मुक्त पंचायत” पहल की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च 2023 को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर वाराणसी से की गई थी। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
पिछले तीन वर्षों में राज्य में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या लगातार बढ़ी है।
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2023: 574 पंचायतें टीबी-मुक्त (लगभग 9%)
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2024: 1,855 पंचायतें टीबी-मुक्त (लगभग 30%)
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2025: 2,157 पंचायतें टीबी-मुक्त (लगभग 35%)
गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज श्रेणी में पंचायतों को प्रमाणपत्र
इस पहल के तहत पंचायतों को तीन श्रेणियों में प्रमाणपत्र दिए जाते हैं:
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ब्रॉन्ज: एक वर्ष तक टीबी-मुक्त स्थिति बनाए रखने पर
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सिल्वर: दो लगातार वर्षों तक स्थिति बनाए रखने पर
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गोल्ड: तीन वर्षों तक टीबी-मुक्त स्थिति बनाए रखने पर
वर्ष 2025 में 2,157 पंचायतों में से
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211 पंचायतें गोल्ड
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646 पंचायतें सिल्वर
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1,300 पंचायतें ब्रॉन्ज श्रेणी में शामिल हुई हैं।
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अंबाला जिला टीबी-मुक्त पंचायतों में सबसे आगे
जिला-वार आंकड़ों के अनुसार अंबाला जिला 191 पंचायतों के साथ राज्य में सबसे आगे है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित की गई हैं।
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भिवानी: 165 पंचायतें
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कुरुक्षेत्र: 145 पंचायतें
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रेवाड़ी: 131 पंचायतें
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सिरसा: 119 पंचायतें
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फतेहाबाद: 116 पंचायतें
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पलवल: 110 पंचायतें
इसके अलावा पंचकूला, गुरुग्राम, करनाल, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, सोनीपत, पानीपत और यमुनानगर जिलों में भी कई पंचायतें टीबी-मुक्त प्रमाणपत्र के लिए पात्र पाई गई हैं।
त्रि-स्तरीय प्रक्रिया से होता है सत्यापन
डॉ. मिश्रा ने बताया कि पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित करने के लिए तीन स्तर की सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, सिविल सर्जन तथा दूसरे जिले के डिप्टी सिविल सर्जन (टीबी) द्वारा दावों की जांच और पुष्टि की जाती है।
यह सुनिश्चित किया जाता है कि पंचायतें भारत सरकार द्वारा तय किए गए छह मानकों को पूरा करती हों।
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा हरियाणा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और प्रभावी कार्यान्वयन के कारण हरियाणा टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार आने वाले समय में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या और बढ़ाने के लिए अभियान को और मजबूत करने पर काम कर रही है।

