अभिनेता आदर्श गौरव ने नॉर्थईस्ट भारत की जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को दिखाने वाली डॉक्यू-सीरीज ‘द ट्राइबल वॉइस’ की शूटिंग असम के माजुली द्वीप से शुरू की।
फिल्म ‘तू या मैं’ के रिलीज के बाद अभिनेता आदर्श गौरव ने अपनी नई डॉक्यू-सीरीज ‘द ट्राइबल वॉइस’ की शूटिंग शुरू कर दी है। यह सीरीज नॉर्थईस्ट भारत की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से दिखाने का प्रयास करेगी।
इस डॉक्यू-सीरीज की शूटिंग का पहला चरण असम के प्रसिद्ध माजुली द्वीप से शुरू हुआ है। माजुली को दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में गिना जाता है और यह अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां की जनजातीय परंपराएं, संगीत, मौखिक इतिहास और स्थानीय जीवनशैली इस सीरीज का मुख्य हिस्सा होंगी।
सीरीज के माध्यम से आदर्श गौरव नॉर्थईस्ट भारत की अलग-अलग जनजातियों के बीच जाकर उनकी संस्कृति, खान-पान, परंपराओं और जीवन दर्शन को समझने और दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। यह परियोजना सांस्कृतिक विरासत, पहचान और समुदायों की मजबूती जैसे विषयों को भी सामने लाएगी।
also read : ‘भूत बंगला’ का नया पोस्टर रिलीज: पेड़ से उल्टे लटके दिखे अक्षय कुमार, 12 मार्च को आएगा फिल्म का टीजर
इस परियोजना के बारे में बात करते हुए आदर्श गौरव ने कहा कि उन्होंने इस सीरीज के लिए इसलिए हामी भरी क्योंकि यह उन्हें नॉर्थईस्ट भारत की संस्कृतियों को करीब से जानने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि इस सीरीज के दौरान उन्हें स्थानीय समुदायों के साथ समय बिताने, उनके भोजन का स्वाद लेने, उनकी कहानियां सुनने और उनकी जनजातीय इतिहास को समझने का अनूठा अनुभव मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कई ऐसे समुदाय हैं जिनके बारे में हम बहुत कम जानते हैं, और इस सीरीज के जरिए उन लोगों और उनकी परंपराओं को जानने का अवसर मिला। आदर्श गौरव के अनुसार यह अनुभव उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा।
‘द ट्राइबल वॉइस’ को एडस्टेड (Edstead) की ओर से चारु बुधिराजा द्वारा एक सिनेमैटिक फैक्टुअल नैरेटिव के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस सीरीज को एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि डेंट्सु स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट इस परियोजना में इंटीग्रेशन पार्टनर के रूप में जुड़ा है।
फिलहाल यह सीरीज निर्माणाधीन है और इसके प्रीमियर की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। उम्मीद है कि यह डॉक्यू-सीरीज दर्शकों को नॉर्थईस्ट भारत की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की गहरी झलक दिखाएगी और देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को समझने का नया नजरिया देगी।

