चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में ‘Judges: Present and Future’ विषय पर पैनल चर्चा में न्यायपालिका में डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
इंटरनेशनल डिस्प्यूट्स वीक 2026 के दौरान चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में “Judges: Present and Future” विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में न्यायपालिका के सदस्यों ने डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में अदालतों की बदलती भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
इस सत्र का संचालन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद छिब्बर ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक न्याय प्रणाली में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है, लेकिन न्यायालयों को हमेशा पूर्व न्यायाधीशों द्वारा विकसित न्यायशास्त्र से मार्गदर्शन लेते रहना चाहिए।
डिजिटल कोर्टरूम और वर्चुअल सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि महामारी के दौरान वर्चुअल सुनवाई की शुरुआत तेज हुई और इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए। उनके अनुसार डिजिटल कोर्टरूम से समय की बचत होती है, यात्रा की जरूरत कम होती है और न्याय तक पहुंच आसान बनती है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में हाइब्रिड मॉडल अधिक प्रभावी होगा, जिसमें फिजिकल और वर्चुअल सुनवाई दोनों का संतुलन रहेगा और साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुकदमों की संख्या और प्रशासनिक फैसले
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विनोद भारद्वाज ने कहा कि देश में सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है। यदि प्रशासनिक स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जाएं तो कई मामलों को अदालत तक पहुंचने से पहले ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक लंबित मामलों पर चर्चा करते समय प्रक्रियात्मक चरणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
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न्याय व्यवस्था में AI की भूमिका
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस हरकेश मनुजा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्यायाधीशों और वकीलों के लिए कानूनी शोध और केस मैनेजमेंट में उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि AI केवल एक सहायक उपकरण हो सकता है और इसे मानवीय न्यायिक निर्णय का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। साथ ही उन्होंने कानूनी पेशेवरों को AI से प्राप्त जानकारी को इस्तेमाल करने से पहले सत्यापित करने की सलाह दी।
कानूनी शिक्षा में तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत
पैनल चर्चा के अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल तकनीक और AI का उपयोग न्याय प्रणाली में बढ़ रहा है, इसलिए भविष्य के वकीलों और न्यायाधीशों के लिए कानूनी शिक्षा में तकनीकी प्रशिक्षण को शामिल करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुलभ बना सकती है, लेकिन न्याय का मूल आधार हमेशा मानवीय विवेक और न्यायिक समझ ही रहेगा।

